प्राइम टाइम

प्राइम टाइम - ऑनलाइन शॉपिंग से मोनोपोली का खतरा

Posted by Divyansh Joshi on



भारत में ऑनलाइन खरीदारी का चलन काफी बढ़ गया है। सब्जी से लेकर हैंडसेट तक ग्राहक घर बैठे ही ऑनलाइन ऑर्डर कर देते हैं। इस बढ़ते चलन में ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए अमेजन, फ्लिपकार्ट और पेटीएम मॉल जैसी ई-कॉमर्स कंपनियां कई ऑफर्स पेश करती हैं। ग्राहकों के अलावा इन ऑफर्स का बड़ा फायदा रिटेलर्स भी उठाते हैं।आज भी कई लोग ऐसे हैं जो ऑनलाइन सामान पर ज्यादा विश्वास नहीं करते और वो ऑफलाइन खरीदारी ही करना पसंद करते हैं। ऐसे ग्राहकों को रिटेलर्स से स्मार्टफोन खरीदने में काफी नुकसान झेलना पड़ता है और इसका फायदा रिटेलर्स को होता है। ऐसा इसलिए क्योंकि रिटेलर्स डिस्काउंट के साथ ई-कॉमर्स वेबसाइट्स से स्मार्टफोन सहित अन्य जरूरत के सामान खरीदते हैं। इन वस्तुओ को रिटेलर्स मार्किट प्राइस पर ही ऑफलाइन ग्राहकों को बेच देते हैं। ऐसे में जिस डिस्काउंट का फायदा ग्राहक को होना चाहिए वो पूरा फायदा रिटेलर्स उठा लेते हैं।रिटेलर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने छोटे रिटेलर्स के लाभ कमाने के इस तरीके को रिटेलर बाजार के लिए खतरा बताया है। छोटे रिटेलर्स सबसे ज्यादा एफऍमसीजी प्रोडक्ट यानी डिटर्जेंट, साबुन, सॉस, चॉकलेट, जूस और स्नैक्स जैसी चीजों को ऑनलाइन खरीते हैं क्योंकि इनमें सबसे ज्यादा डिस्काउंट दिया जाता है। अगर आंकड़ों पर गौर किया जाए तो इस बार फेस्टिव सीजन के दौरान ऑनलाइन सेल्स में 20 फीसद की हिस्सेदारी रिटेलर्स की ही रही है।एक रिपोर्ट में पता चला है कि रिटेलर्स ऑनलाइन खरीदारी के लिए 5 से 10 लॉगइन का इस्तेमाल कर रहे हैं। आरएआई मानें तो अगर यही स्थिति जारी रही तो ऑनलाइन मार्केट प्लेस में एक ऐसा मोनोपोली की स्थिति पैदा हो जाएगी जिसे तोड़ना काफी मुश्किल होगा। इस स्थिति के कारण ग्राहक उसी कीमत में सामान खरीदने पर मजबूर होंगे जो ऑनलाइन वेबसाइट तय करेंगी। जिसके कारण आने वाले समय में आनलाईन शापिंग ही मूल्य निर्धारण करेगी जो उनकी मोनोपली के कारण होगा और आम कस्टमर्स के लिए काफी महंगा साबित होगा ।



आज भी कई लोग ऐसे हैं जो ऑनलाइन सामान पर ज्यादा विश्वास नहीं करते और वो ऑफलाइन खरीदारी ही करना पसंद करते हैं। ऐसे ग्राहकों को रिटेलर्स से स्मार्टफोन खरीदने में काफी नुकसान झेलना पड़ता है और इसका फायदा रिटेलर्स को होता है। ऐसा इसलिए क्योंकि रिटेलर्स डिस्काउंट के साथ ई-कॉमर्स वेबसाइट्स से स्मार्टफोन सहित अन्य जरूरत के सामान खरीदते हैं। इन वस्तुओ को रिटेलर्स मार्किट प्राइस पर ही ऑफलाइन ग्राहकों को बेच देते हैं। ऐसे में जिस डिस्काउंट का फायदा ग्राहक को होना चाहिए वो पूरा फायदा रिटेलर्स उठा लेते हैं।

रिटेलर्स का यह तरीका बाजार के लिए खतरा:

रिटेलर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (RAI) ने छोटे रिटेलर्स के लाभ कमाने के इस तरीके को रिटेलर बाजार के लिए खतरा बताया है। छोटे रिटेलर्स सबसे ज्यादा FMCG प्रोडक्ट यानी डिटर्जेंट, साबुन, सॉस, चॉकलेट, जूस और स्नैक्स जैसी चीजों को ऑनलाइन खरीते हैं क्योंकि इनमें सबसे ज्यादा डिस्काउंट दिया जाता है। अगर आंकड़ों पर गौर किया जाए तो इस बार फेस्टिव सीजन के दौरान ऑनलाइन सेल्स में 20 फीसद की हिस्सेदारी रिटेलर्स की ही रही है।

एक रिपोर्ट में पता चला है कि रिटेलर्स ऑनलाइन खरीदारी के लिए 5 से 10 लॉगइन का इस्तेमाल कर रहे हैं। RAI की मानें तो अगर यही स्थिति जारी रही तो ऑनलाइन मार्केट प्लेस में एक ऐसा मोनोपोली (एकाधिकारवाद) की स्थिति पैदा हो जाएगी जिसे तोड़ना काफी मुश्किल होगा। इस स्थिति के कारण ग्राहक उसी कीमत में सामान खरीदने पर मजबूर होंगे जो ऑनलाइन वेबसाइट तय करेंगी। जिसके कारण आने वाले समय में आनलाईन शापिंग ही मूल्य निर्धारण करेगी जो उनकी मोनोपली के कारण होगा और आम कस्टमर्स के लिए काफी महंगा साबित होगा ।