प्राइम टाइम

प्राइम टाइम - एक परिसर-एक शाला में कई खामिया

Posted by Divyansh Joshi on



मध्यप्रदेश सरकार चुनावी साल में हर किसी का मन मोहने के लिए लगातार प्रयास कर रही है । इसी क्रम में सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील मुद्दा निकल कर सामने आया है जो है शिक्षा का । जिस पर भी अब शिवराज सरकार ने सरकारी स्कूलों के बच्चों को अच्छी शिक्षा देने के लिए एक परिसर-एक शाला का कांसेप्ट लेकर आई है । जिसमें एमपी के 34,997 स्कूलों को मर्ज किया जा रहा है। मर्ज के बाद प्रदेश में 15961 सरकारी स्कूल रह जाएंगे और 19036 स्कूल परिसर बंद कर दिए जाएंगे। 1 अक्टूबर तक मर्ज किए जाने वाले स्कूल सरकारी स्कूलों में शिफ्ट कर दिए जाएंगे। हालांकि बंद होने वाले स्कूल के भवनों के बारे में बाद में फैसला किया जाएगा। इतना ही नहीं जो स्कूल शिफ्ट किए जा रहे हैं उनके छात्रों को आने-जाने के लिए बस या ऑटो उपलब्ध कराए जाएंगे। स्कूल शिक्षा विभाग ने सभी जिलों के कलेक्टर्स को निर्देश भी दे दिए हैं। ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि बच्चों को बेहतर शिक्षा मिल सकें और खर्च भी कम हो । इस पर सरकार का कहना है इससे स्कूलों में टीचर्स के रोस्टर में जो गड़बड़ी हो रही है वो भी दूर होगी। इसके साथ ही शिक्षकों की मांग में भी कमी आएगी और व्यय पर नियंत्रण हो सकेगा.
लेकिन इन सबके बीच ये बात निकल कर सामने आ रही है कि सरकार के इस नए प्रयोग से सरकारी स्कूलों में शिक्षा का स्तर सुधरेगा। वहीं इस एकीकरण में कई खामियां भी है । जिससे विद्यार्थियों की परेशानियां बढ़ेगी, वहीं शैक्षणिक गुणवत्ता पर भी असर पड़ेगा। जानकारी के अनुसार लोक शिक्षण संचनालय की कार्यशाला एवं वीडियो कान्फ्रेसिंग के निर्देशानुसार विकासखंड शिक्षा अधिकारी द्वारा जनशिक्षकों द्वारा प्रस्तुत प्रस्तावों पर विकासखंड की शालाओं का एकीकरण किया गया है। जिसमें 116 शालाओं को आपस में एक दूसरे में समायोजित कर 56 शालाएं कर दी गई है। आनन फानन में किए गए समायोजन में विसंगतियों का ध्यान नहीं रखा गया है। कही जर्जर भवन वाली शालाओं में समायोजन कर दिया तो कही पर एक ही शिक्षक वाले विद्यालय को दूसरी शाला से अलग कर दिया गया है।
शालाओं के समायोजन में प्राथमिक शालाओं के प्रधानपाठकों को माध्यमिक शालाओं का प्रभारी बना दिया गया है । इसमे समझने वाली बात यह है कि माध्यमिक शाला के शिक्षकों के लिए स्नातक उत्तीर्ण शिक्षकों की व्यवस्था की गई थी, लेकिन अब वापस उन्हीं शिक्षकों को माध्यमिक शालाओं का प्रभारी बना दिया गया है, ऐसे में हायर सेकंडरी की योग्यता रखने वाले शिक्षक माध्यमिक शालाओं के विद्यार्थियों को पढ़ाएंगे, जो बड़ी खामी है ।
वहीं सरकार की इस योजना का शिक्षक ही विरोध कर रहे है । शिक्षकों का कहना है कि इस योजना से आरटीई के नियमों का पालन नहीं होगा। शिक्षकों ने बताया कि एक परिसर एक शाला योजना के माध्यम से शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने की बात कही जा रही है,लेकिन ऐसा नहीं होगा स्तर और गिर जाएगा। नई योजना के लिए शासन स्तर से कोई आदेश जारी नहीं किए गए हैं। योजना को वैद्यानिक मान्यता नहीं है। प्राथमिक, माध्यमिक, हाइस्कूल और हायरसेकंडरी स्कूल एक साथ संचालित होने से छात्रों को पर्याप्त भौतिक सुविधाएं नहीं मिल सकेगी ।