प्राइम टाइम

प्राइम टाइम - भारत की गिरती अर्थव्यवस्था भाजपा सरकार के लिए खतरा

Posted by Divyansh Joshi on



मध्यप्रदेश के साथ 4 अन्य राज्यों में चुनाव की घोषणा हो चुकी है , इनमें से ज्यादातर राज्यों में बीजेपी की सरकार है । वहीं दूसरी ओर ज्यादातर राज्यों में भाजपा की सरकार है और केंद्र में भी भाजपा की सरकार है । वहीं दूसरी ओर पेट्रोलियम के बढ़ते दामों को लेकर केंद्र सरकार की आलोचना हो रही है जिसका खामियाजा सीधे तौर में बीजेपी शासित राज्यो को झेलना पड़ सकता है । सरकार के मुताबिक कच्चे तेल की कीमतें भी 4 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है हालांकि इस दौरान केंद्र ने 2 रुपए 50 पैसे पेट्रल और डीजल में कम किए । तो वही कई बीजेपी शासित राज्यो ने भी ठाई रुपये की कमी की जिसके बाद राज्यो में पेट्रोल 5 रुपये तक सस्ता हो गया लेकिन इन सबके बावजूद भी पेट्रोलियम दामों में कोई खास कमी नहीं आई हम मध्यप्रदेश की बात करें तो यहां पेट्रोल कई जिलों में 90 के स्तर कर पार कर चुका था , जब इसमें 5 रुपये की कमी की गई तो भी पेट्रोल 85 रुपये के पास बिक रहा है । ऐसे में अब जनता का ध्यान पेट्रोल के दामों से भटकाने का नया मौका सरकार ने ठूठ लिया है और वह है विधानसभा चुनाव के बाद लगी आचार संहिता । अब मीडिया भी मध्यप्रदेश में आचार संहिता लागू होने के बाद पेट्रोल और डीजल के दामों को लेकर लोगो की समस्या सामने नहीं ला पा रहा है । जबकि अगर गौर करें तो आचार संहित लगने से पेट्रोल और डीजल के दामों में लगातार कमी हो रही है । इससे साफ जाहिर होता है कि आने वाले समय में पेट्रोल के दाम 100 के पार पहुच जाए तो कोई हैरानी नहीं होगी । वहीं दूसरी तरफ अगर देश की इकोनामी की बात करें तो डॉलर के मुकाबले 74 रुपए 27 पैसे के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुच गया है । शेयर मार्केट भी आज तक के सबसे निचले स्तर पर आ गया है । इसका मतलब यह है कि देश की इकानामी गिरते जा रही है । अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपए में गिरावट रोकने के विकल्पों पर वित्त मंत्रालय की भारतीय रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया से बातचीत कर रहा है । और सरकार ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के लिए डॉलर शॉप विंडो खोलने पर विचार कर रही । इसका एक कारण यह भी है कि विदेशी निवेशक अपना पैसा मार्केट से निकाल रहे है । जिसके कारण शेयर मार्केट से विदेशी निवेश कम हो रहा है और शेयर मार्केट लगातार नीचे जा रहा है । जो आने वाले समय में देश की अर्थव्यव्स्था के लिए ठीक नहीं है और इससे आने वाले लोकसभा और विधानसभा चुनाव में भी इसका खासा असर देखने को मिलेगा ।