प्राइम टाइम

प्राइम टाइम - कमलनाथ का सातवां सवाल

Posted by Divyansh Joshi on



20 अक्टूबर से प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से मध्यप्रदेश की बदहाली को लेकर रोज एक सवाल पूछ रहे है और यह सवाल कमलनाथ केंद्र सरकार और उनके अधीन काम कर रही संस्थाओं की रिपोर्ट के आधार पर पूछ रहे है जो कहीं न कहीं बीजेपी के साथ ही शिवराज सिंह चौहान मुश्किलें बढ़ा रहे है । इसी क्रम में आज कमलनाथ ने शिक्षा को लेकर शिवराज सिंह से कुछ सवाल पूछे है । राज्‍य की शिक्षा व्‍यवस्‍था को कठघरे में खड़ा करते हुए उन्होंने कैग की रिपोर्ट का हवाला दिया है। कविता से तंज कसते हुए उन्‍होंने शिवराज सिंह चौहान सरकार से सवालों की झड़ी लगा दी है और ढेर सारे तथ्‍य प्रस्‍तुत किए हैं. अपने सातवे सवालों की झड़ी में कमलनाथ ने मध्यप्रदेश के स्कूलो में बिजली नहीं पहुचने की बात कही है । कमलनाथ ने लिखा है कि 71% स्कूलों मे बिजली पहुँची ही नहीं है । मध्यप्रदेश के नौनिहालों की आधुनिक शिक्षा का हाल यह है कि मात्र 15. 7 % स्कूलों में कंप्यूटर एजुकेशन की व्यवस्था है, अर्थात राज्य के 1लाख़ 22 हजार स्कूलों में आज भी कम्प्यूटर शिक्षा नहीं है । मध्यप्रदेश के सिर्फ़ 15.6 % माध्यमिक स्कूलों में और मात्र 19% उच्चतर माध्यमिक स्कूलों में लाइब्रेरी की व्यवस्था है । सरकारी स्कूलों में तो यह नगण्य है । उन्होने केंद्र की डाईस-2017 रिपोर्ट के आधार पर कहा है कि मध्यप्रदेश में 19 हज़ार स्कूल एक-एक शिक्षक के भरोसे चलते हैं । 14 हज़ार स्कूलों में बारिश के दिनों में पहुँच का रास्ता ही नहीं रहता,यानी इन स्कूलों में बच्चे पढ़ने ही नहीं जा पाते। आज भी मप्र के 4451 स्कूलों में सिर्फ़ एक ही कमरा है। यानी चार से आठ वर्ग के बच्चे एक ही रूम में पढ़ते हैं। कैग की 2017 की रिपोर्ट बताती है कि मध्यप्रदेश के माध्यमिक स्कूलों में 63 हज़ार 851 शिक्षकों की कमी है। सीएजी की रिपोर्ट के मुताबिक़ सरकार ने स्कूल शिक्षा के लिए आवंटित कुल बजट में से 2011-2016 के बीच 7284 करोड़ रुपए जारी ही नहीं किये। सरकार बच्चों के शिक्षा के अधिकार के हनन में सबसे बड़ी अपराधी रही । कैग की 2017 की रिपोर्ट बताती है कि मध्यप्रदेश के माध्यमिक स्कूलों में 63 हज़ार 851 शिक्षकों की कमी है। सर्व शिक्षा अभियान के तहत 1 से 8 वीं तक मुफ़्त किताबें बाँटे जाने का प्रावधान है, कैग ने अपनी 2017 की रिपोर्ट में बताया कि 2010 से 2016 तक 42 लाख़ 88 हज़ार किताबें बाँटी ही नहीं गईं । आपको बता दें कि कमलनाथ अपने यह सवाल केंद्र सरकार और उनके अधीन कार्य कर रही संस्थाओं की रिपोर्ट के आधार पर पूछ रहे है । जो इन सवालों की सत्यता बताते है लेकिन भाजपा इन सवालों के न तो जवाब दे रही और न ही इन सवालों को गंभीरता से ले रही है । फिर भी कहीं न कहीं कमलनाथ के यह सवाल भाजपा की मुश्किलें बढ़ा सकते है ।