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प्राइम टाइम - सुप्रीम कोर्ट ने आज एक साथ तीन बड़े फैसले दिए

Posted by Divyansh Joshi on



सुप्रीम कोर्ट ने आज एक साथ तीन बड़े फैसले दिए । पहला मुद्दा आधार से जुड़ा था दूसरा कोर्ट से सीधा प्रसारण और प्रमोशन से आरक्षण से जुड़े है । देश भर की अदालती कार्यवाही का अब सीधा प्रसारण (लाइव स्ट्रीमिंग) हो सकेगी। वहीं आधार नंबर अब संवैधानिक रूप ले चुका है इसके अलावा प्रमोशन में आरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने 2006 में दिए अपने फैसले पर दोबारा विचार करने से इनकार कर दिया। कोर्ट से बाहर निकलने के बाद वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने क्या कुछ कहा आईये देखते है ।
सुप्रीम कोर्ट ने अदालती कार्यवाही का सीधा प्रसारण और वीडियो रिकॉर्डिंग करने की मांग वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए अपना फैसला सुनाया। शीर्ष न्यायालय ने कहा कि सीधा प्रसारण सेवा की शुरुआत वह अपने यहां से करेगा। हालांकि इसके लिए कुछ नियमों को पालन करना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा, श्कोर्ट की कार्यवाही का सीधा प्रसारण होने से न्यायिक प्रणाली में जवाबदेही बढ़ेगी।श् प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने 24 अगस्त को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। कोर्ट ने कहा कि इसकी शुरुआत सुप्रीम कोर्ट से ही होगी। इसके लिए नियमों का पालन करना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अदालत की कार्यवाही का सीधा प्रसारण न्यायिक प्रणाली में पारदर्शिता लाएगा ।
वहीं आधार की अनिवार्यता और उससे निजता के उल्लंघन पर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को अहम फ़ैसला दिया.. शीर्ष अदालत की संवैधानिक बेंच ने बहुमत से कहा कि आधार नंबर संवैधानिक रूप से वैध है...कहा- ‘सरकारी योजनाओं के लाभ के लिए यह अनिवार्य रहेगा। हालांकि, स्कूलों में एडमिशन और बैंक खाता खोलने के लिए यह जरूरी नहीं है।’ दूसरा फैसला सरकारी नौकरी में प्रमोशन में आरक्षण का लाभ देने पर था। इस पर कोर्ट ने अपना 2006 का फैसला बरकरार रखते हुए कहा कि राज्यों को प्रमोशन में आरक्षण के लिए आंकड़ा जुटाने की जरूरत नहीं है। तीसरे फैसले में अदालती कार्रवाई की लाइव स्ट्रीमिंग को मंजूरी दी गई। कोर्ट का कहना था कि इससे पारदर्शिता आएगी।
सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी नौकरियों में आरक्षण पर 2006 में दिए अपने फैसले पर दोबारा विचार करने से इनकार कर दिया। यह फैसला एम नागराज के मामले में दिया गया था। इसमें कहा गया था कि राज्य सरकारें कुछ शर्तों के साथ प्रमोशन में आरक्षण दे सकती हैं, लेकिन इसके लिए उन्हें संबंधित समुदाय के पिछड़ होने के आंकड़े देने होंगे। केंद्र का कहना था कि इसमें शर्तें बेवजह लगाई गई हैं। ऐसे में इसे सात जजों की बेंच के पास दोबारा विचार के लिए भेजा जाना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने तीन मामलों में फैसले सुनाए
1 आधार की संवैधानिक वैधता बरकरार, पैन कार्ड और इनकम टैक्स के लिए जरूरी
2 राज्य सरकारें प्रमोशन में आरक्षण दे सकती हैं
3 अदालती कार्यवाही का प्रसारण हो