प्राइम टाइम

प्राइम टाइम - मध्यप्रदेश में रिकॉर्ड मतदान के मायने !

Posted by Divyansh Joshi on



मध्यप्रदेश में चुनाव हो चुके हो और प्रत्याशियों का भविष्य अब ईवीएम मशीन में बंद है, अब उनकी किस्मत का फैसला 11 दिसंबर को होगा , लेकिन इस बार प्रदेश में रिकार्ड मतदान हुआ । इतना मतदान तो तब भी नहीं हुआ जब मोदी लहर थी । 2013 और 2014 के दरम्यान मोदी लहर थी लेकिन 2018 में उस वक्त से भी ज्यादा मतदान हुआ है । चुनाव आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक, इस बार 2013 से भी 8 फीसदी ज्यादा मतदान हुआ है , लेकिन इसका मतलब क्या है । आज इसी पर बात करेंगे । मतदान के अंतिम आंकड़े भी आ गए है । पूरे प्रदेश में 74.85 फीसदी मतदान हुआ है । मतलब यह है कि 2008 के विधानसभा चुनाव के 70 फीसदी , 2013 के विधानसभा के 70.8 फीसदी , 2014 लोकसभा चुनाव के 61.6 फीसदी मतदान के मुकाबले आज नया भारी रिकॉर्ड बना है । आंधी के बावजूद 7ः ज्यादा मतदान हुआ तो क्या इसे सहज सामान्य माना जाए । 2003 के मतदान में दिग्विजय सिंह के खिलाफ सत्ता परिवर्तन विरोधी आंधी के वक्त भी नहीं हुआ था । 67 प्रतिशत मतदान हुआ था। इस बार मतदान का इतना भारी जंप छत्तीसगढ़ में भी नहीं है । छत्तीसगढ़ चुनाव में अभी 76.35 प्रतिशत मतदान का आंकड़ा है जो 2013 के विधानसभा चुनाव के 77.40 प्रतिशत से 1ः कम है । उस नाते कह सकते हैं कि छत्तीसगढ़ के मतदाताओं ने भी विधानसभा के ताजा चुनाव में आंधी के अंदाज में वोट डाला है । दोनों ही राज्यों में लोगों ने जोश के साथ , कुछ ठान कर निश्चय कर वोट डाला है । जाहिर है अपनी चुनाव प्रक्रिया में पीएम के भाषण से पहले और उनके बाद के परिवर्तनों ने बहुत कुछ बदला है । पहले मतदाता सूचियों में बहुत फर्जीवाड़ा हुआ करता था । फर्जी फोटो और गलतियों के चलते मतदाताओं का आंकड़ा खुला हुआ होता था । 10 - 15ः तक फर्जी वोट हुआ करते थे । पहले 55 से 60ः मतदान बड़ी बात हुआ करती थी । तब मतदाता सूची में फर्जीवाड़ा था । वोटर आईडी , वोटर लिस्ट में बार-बार सुधार , जागरुकता अभियान से भी मतदान का आंकड़ा बढ़ा है । और भी कई कारण हैं जिनसे लोगों के बीच मतदान की जरूरत और जागरूकता बनी है । बावजूद इसके अपना मानना है कि 60ः से कम या अधिक मतदान लोगों की मूड , उत्साह अनु उत्साह का प्रतीक है । और 75ः का आंकड़ा तो निश्चित ही मतदाताओं के मॉल इरादों पर आंधी का संकेत है । ऐसा पार्टियों के प्रबंधन से नहीं बल्कि भावनाओं से , मन के अनुभव से वोट डालने की इच्छा से होता है ।हालांकि, शिवराज से लेकर कैलाश विजयवर्गीय तक सभी ने जी तोड़ मेहनत की। लेकिन इस बार कांग्रेस को जनता चुनाव लड़वा रही है , क्योंकि पिछले तीन चुनावों के मुकाबले में कांग्रेस के 2 प्लस प्वाइंट थे । एक कांग्रेसियों में पहली बार एकजुटता थी । दूसरे दिग्विजय सिंह ने मौन रहकर दमदार बिसात बिछाई । बहरहाल देश के दल मध्य प्रदेश ने सचमुच धड़कन बढ़वा दी है । 11 दिसंबर तक बेचौनी रहेगी ,और दो प्रदेशों के मतदान आंकड़े के बाद यह कहा जा सकता है कि राजस्थान में भी रिकॉर्ड तोड़ मतदान होगा ।