व्यक्तित्व

उथल पुथल भरा बचपन रहा राहुल गांधी का.

Posted by Karan Pawar on



कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी 19 जून को 48 साल के हो गए। देशभर में कांग्रेस पार्टी उनके जन्मदिन को उत्सव की तरह मना रही है और कई कार्यक्रम का आयोजन किया है। प्रधानमंत्री मोदी समेत देश के जाने माने विपक्षी नेता भी उन्हें बधाई संदेश भेज रहे हैं। उनका जीवन उथल-पुथल भरी घटनाओं से भरा रहा है। जब वो 10 साल के थे, तभी चाचा संजय गांधी की प्लेनक्रैश में मौत हो गई थी। किशोर हुए तब 14 साल की उम्र में 1984 में उनकी दादी और तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या कर दी गई। 21 साल के होने से पहले ही पिता और पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या कर दी गई। जब दादी इंदिरा गांधी की हत्या हुई थी तब राहुल बहन प्रियंका के साथ मशहूर दून स्कूल में पढ़ रहे थे। भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच उन्हें देहरादून से दिल्ली लाया गया था। कुछ महीने पहले राहुल गांधी ने एक इंटरव्यू में यह बताया था कि वो कैसे 1984 से लगातार भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच जी रहे हैं। आईआईएम सिंगापुर में एक कार्यक्रम में तब राहुल ने कहा था, 1984 से सुबह-शाम 15 सुरक्षाकर्मियों से घिरे रहते हैं। यह सुरक्षा घेरा उनकी जिंदगी में शामिल हो चुका है दादी इंदिरा गांधी और पिता राजीव गांधी की हत्या के बाद से राहुल गांधी की जिंदगी बेपटरी हो गई थी। उन्हें दादी की हत्या के बाद दून स्कूल छोड़ना पड़ा था। पिता राजीव ने तब उन्हें घर पर रखकर ही पढ़ाई पूरी करवाई थी। जब पिता की हत्या हुई तो फिर उन्हें पढ़ाई छोड़नी पड़ी और नाम बदलकर रहने को विवश होना पड़ा। राहुल ने कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के ट्रिनिटी कॉलेज से 1995 में एमफिल किया। इसके बाद राहुल ने तीन साल तक लंदन के मॉनीटर ग्रुप के लिए काम भी किया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस दौरान राहुल ने अपनी मूल पहचान छिपाकर नौकरी की। राहुल के बैचमेट के मुताबिक वो राजनीति में नहीं आना चाहते थे लेकिन 2004 में उन्होंने पैतृक अमेठी संसदीय सीट से चुनाव जीतकर राजनीतिक पारी की शुरुआत की।