प्राइम टाइम

प्राइम टाइम - सांसदों और विधायकों के खि़लाफ़ 4000 से ज़्यादा आपराधिक मामले लंबित

Posted by Divyansh Joshi on



देश में सांसदों और विधायकों के खिलाफ करीब 4,000 आपराधिक मामले लंबित हैं। इस बात की जानकारी सुप्रीम कोर्ट को मंगलवार को दी गयी है। कोर्ट को सूचित किया गया है कि संसद और विधानसभाओं के वर्तमान और कुछ पूर्व सदस्यों के खिलाफ तीन दशक से भी अधिक समय से 4,122 आपराधिक मामले लंबित हैं। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ एक जनहित याचिका पर इस मामले में विचार कर रही है। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि मौजूदा और पूर्व सांसदों-विधायकों के
खिलाफ लंबित मामलों की सुनवाई के लिए बिहार और केरल के हर जिले में विशेष न्यायालय बनाए जाएं। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस एसके कौल और जस्टिस केएम जोसेफ की बेंच ने कहा कि पटना और केरल के हाईकोर्ट 14 दिसंबर तक निर्देशों पर अमल किए जाने की रिपोर्ट भी पेश करें। आपको बता दें कि शीर्ष अदालत ने राज्यों और विभिन्न उच्च न्यायालयों से वर्तमान और पूर्व विधायकों के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों की विस्तृत जानकारी मांगी थी ताकि ऐसे मामलों में जल्द सुनवाई के लिए पर्याप्त संख्या में विशेष अदालतों का गठन किया जा सके। सुप्रीम कोर्ट को मिला यह डेटा बताता है कि 264 मामलों में उच्च न्यायालयों ने सुनवाई पर रोक लगा दी. यही नहीं, वर्ष 1991 से लंबित कई मामलों में तो आरोप तक तय नहीं किए गए हैं। शीर्ष अदालत ने सत्र न्यायालयों से प्राथमिकता पर वर्तमान सांसदों और विधायकों के खिलाफ दर्ज 430 आपराधिक मामले देखने को कहा है।सुप्रीम कोर्ट ने सभी उच्च न्यायालयों से संबंधित राज्यों में सांसदों और विधायकों से जुड़े लंबित आपराधिक मामलों की सुनवाई के लिए अधिक से अधिक सेशन और मजिस्ट्रेट अदालतों को नामित करने के लिए कहा है। वरिष्ठ अधिवक्ता विजय हंसारिया और अधिवक्ता स्नेहा कालिता इस मामले में न्यायमित्र की भूमिका में हैं. उन्होंने राज्यों और उच्च न्यायालयों से प्राप्त डेटा शीर्ष अदालत में पेश किया। अधिवक्ता और भाजपा नेता अश्चिनी उपाध्याय की उस याचिका पर अदालत सुनवाई करेगी जिसमें आपराधिक मामलों में दोषी सिद्ध नेताओं पर ताउम्र प्रतिबंध लगाने की मांग की गई है। इसके अलावा अदालत निर्वाचित प्रतिनिधियों से जुड़े इस तरह के मामलों में तेज सुनवाई के लिए विशेष अदालतें गठित करने पर भी विचार करेगी, पर इन सबके बीच सवाल यह उठता है कि क्या ऐसे सांसदो और विधायकों को चुनाव लड़ने का अधिकार मिलना चाहिए ।