प्राइम टाइम

PRIME TIME - क्या RSS का मुद्दा आम जनता से जुड़ा है ?

Posted by Divyansh Joshi on



मध्यप्रदेश में चुनाव के लिए वक्त कम बचा है चुनाव नामांकन की सारी प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी है और अब चाहे कांग्रेस हो या भाजपा दोनो अब चुनाव प्रचार में लग चुकी है । वहीं दूसरी ओर अब राजनीतिक पार्टियां एक दूसरे के विरोध में कोई न कोई नया मुद्दा उठा देती है । अब चुनाव से पहले मध्य प्रदेश में संघ को लेकर सियासत गरमा गई हैद्य कांग्रेस ने अपने वचन पत्र में सरकारी परिसरों में संघ की शाखाओं पर प्रतिबन्ध की बात कही हैद्य जिसको लेकर भाजपा ने आपत्ति जताई हैद्य जिसके बाद संघ को लेकर बहस तेज हो गई हैद्य बीजेपी और कांग्रेस में बयानबाजी हो रही हैद्य इस बीच अक्सर विवादित बयानों से सुखिऱ्यों में रहने वाले कांग्रेस विधायक सुंदरलाल तिवारी ने संघ को लेकर विवादित टिप्पणी की है, उन्होंने संघ को आतंकवाद का प्रतीक बताया हैद्य रीवा जिले की गुढ़ विधानसभा से कांग्रेस विधायक सुंदरलाल तिवारी ने अपने निवास में प्रेसवार्ता आयोजित करके राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के खिलाफ एक बार फिर विवादित बयान दिया। उन्होंने कहा कि आरएसएस के किसी भी कार्यक्रम में भारतीय झंडा नहीं लगाया जाता। इससे यह साफ जाहिर है कि इसकी गतिविधियां संदिग्ध हैं। उन्होंने आगे कहा है कि आरएसएस पूर्ण रूप से राजनीतिक संगठन हैद्य उन्होंने आरोप लगाया कि संगठन सामाजिक घृणा, नफरत धर्म के नाम पर फैला रहा है और प्रदेश सहित देश में एक अराजकता का माहौल पैदा किया जा रहा है। तिवारी ने कहा कि इनकी शाखा में देश का झंडा कभी नहीं फहराते और यह सब आतंकवाद का प्रतीक है ।
वहीं सुंदर लाल तिवारी के इस बयान के बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान खुद मैदान में उतर आए और उन्होने तिवारी के इस बयान का जवाब देते हुए कहा कि संघ की शाखाओं में सरकारी कर्मचारी हिस्सा लेंगे उन्हें कोई रोक नहीं सकता। कोई भी बैन नहीं लगा सकता है, दम है तो कांग्रेस बेन लगाकर दिखाए।
हालांकि सुंदरलाल तिवारी के संघ को लेकर दिए गए विवादित बयान से कांग्रेस ने किनारा कर लिया । पीसीसी चीफ कमलनाथ ने उनके बयान से पल्ला झाड़ते हुए कहा कि जो केंद्र सरकार के नियम हैं औऱ बाबूलाल गौर और उमा भारती के समय जो नियम थे उनको दोहराया है, ऐसी संस्था होती तो हम प्रतिबंध लगाने की बात करते। न मन है, न मंशा और न ही उद्देश्य कि कोई बैन लगाया जाए।
मध्यप्रदेश की राजनीति में इस बार आरएसएस के अलावा भी कई मुद्दे है जो धीरे धीरे बाहर आ रहे है लेकिन सोचने वाली बात यह है कि क्या यह मुद्दे प्रदेश की जनता की परेशानी से जुड़े हुए हैं , या सिर्फ यह एक पालिटिकिस इश्यू बनकर रह जाएंगे । वैसे यह कोई नई बात नहीं है हर बार चुनाव के समय ऐसे ही मुद्दे उठाए जाते है जो सिर्फ राजनीति से संबंधित है इनमें कहीं भी आम जनता की परेशानी का जिक्र नहीं है । बहरहाल चुनाव का रण बस कुछ ही दूर है और अगर आम जनता चाहे तो अपने हिसाब से इस रण में जीत सकती है । बस एक मजबूत इरादे की बात है