प्राइम टाइम

प्राइम टाइम - सीएम की गले की हड्डी बना एससीएसटी एक्ट को लेकर दिया बयान

Posted by Divyansh Joshi on



एससीएसटी एक्ट में संशोधन अब मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की गले की हड्डी बन गया है । एक तरफ जहां पूरे प्रदेश में एससीएसटी एक्ट में संशोधन का विरोध चल रहा है तो दूसरी तरफ एससीएसटी एक्ट को मुद्दा बनाकर सपाक्स ने अपनी दावेदारी पेश की है ।
वहीं एससीएसटी एक्ट में संशोधन को लेकर बालाघाट में सीएम शिवराज ने कहा था कि मध्यप्रदेश में एट्रोसिटी में तुरंत गिरफ्तारी नहीं होगी । जिसके बाद अब हाईकोर्ट की ग्वालियर बैंच ने सीएम शिवराज सिंह चौहान के बयान पर राज्य शासन से स्पष्टीकरण मांगा है.ग्वालियर हाई कोर्ट के जस्टिस जीएस अहलूवालिया ने कहा सरकारी वकील ये बताएं कि क्या मुख्यमंत्री ने ऐसा कोई बयान दिया है कि डच् में जांच के बिना एससी एसटी एक्ट के मामलों में गिरफ्तारी नहीं होगी ...जो अब मुख्यमंत्री के लिए गले की हड्डी बन गया है । 4 अक्टूबर गुरुवार को इस मामले की सुनवाई होगी. कोर्ट ने एसपी रैंक के अधिकारी को शपथ पत्र पर जवाब पेश करने के लिए कहा है.कोर्ट ने शिवपुरी ज़िले के एक सरकारी डॉक्टर की अग्रिम ज़मानत याचिका पर सुनवाई के लिए ये स्पष्टीकरण मांगा है. याचिकाकर्ता डॉक्टर अतेन्द्र रावत ने अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी . इसमें उन्होंने खुद पर झूठा मुकदमा लगा होने का हवाला देकर अग्रिम ज़मानत मांगी है.
डॉक्टर रावत ने याचिका में कहा है कि मेरे प्रति दुर्भावना से प्रेरित होकर झूठा मुकदमा दर्ज किया गया है. उन्होंने अपने पक्ष में सीएम शिवराज सिंह चौहान के उस बयान का हवाला दिया है जिसमें उन्होंने कहा था कि एससी-एसटी एक्ट में बिना जांच गिरफ्तारी नहीं की जाएगी. डॉक्टर रावत याचिका की सुनवाई के बाद हाई कोर्ट की ग्वालियर बैंच ने सीएम के उस बयान को लेकर स्पष्टीकरण मांगा है.
पहले जब सीएम ने इस एक्ट को लेकर कोई बयान नहीं दिया था तो सामान्य पिछड़ा वर्ग उनका विरोध कर रहा था फिर जब सीएम ने कहा कि इस एक्ट में तुरंत गिरफ्तारी नहीं होगी तब एससीएसटी वर्ग उनका विरोध कर रहे है साथ ही अब तो हाई कोर्ट ने भी राज्य सरकार को तलब कर लिया है ।