प्राइम टाइम

प्राइम टाइम - नेता गिरी में लगा साधु-संतों का मन

Posted by Divyansh Joshi on



मोहमाया से दूर रहने वाले साधु-संतों को अब सत्ता का मोह सताने लगा है। मध्यप्रदेश में राज्यमंत्री का दर्जा मिलने के बाद मंत्री बने बाबा अब 2018 के लिए चुनाव में उतरने की तैयारी कर रहे हैं। करीब 10 बाबा कमंडल और चिमटा किनारे रखकर विधानसभा चुनाव के दंगल के लिए ताल ठोंक रहे हैं। कुछ बाबाओं ने तो जनसंपर्क भी शुरू कर दिया है। वहीं, कुछ धार्मिक आयोजनों के जरिए ही वोट की जुगाड़ में लगे हैं । बाबाओं को सबसे ज्यादा उम्मीद भाजपा है क्योंकि, सरकार ने कंप्यूटर बाबा, योगेंद्र गिरी, अखिलेश्वरानंद को मंत्री का दर्जा दिया है। वहीं, साध्वी उमा भारती और योगी आदित्यनाथ भी मठ-अखाड़ों से निकलकर सीएम हाउस तक भाजपा के जरिए ही पहुंचे हैं। हालांकि, भाजपा से टिकट नहीं मिला तो ये बाबा कांग्रेस के डेरे में भी धूनी रमाने को तैयार हैं और अगर कांग्रेस से भी टिकट नहीं मिला तो कई बाबा निर्दलीय भी मैदान में उतरने को तैयार है । राज्य की शिवराज सिंह चौहान की नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार ने ऐसे पांच बाबाओं को इस साल अप्रैल में राज्यमंत्री का दर्जा दिया थाप्अब प्रदेश के सियासी अखाड़े में अन्य साधु-संतों की भी एंट्री हो रही है अपने अनुयायियों में कम्प्यूटर बाबा के नाम से मशहूर स्वामी नामदेव त्यागी का कहना है कि मैं चुनाव लड़ने का इच्छुक हूं, मैं बीजेपी पर टिकट के लिए दबाव नहीं बनाऊंगा, अगर मुख्यमंत्री चौहान मुझे विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए कहेंगे, तो मैं तैयार हूं। वहीं अन्य साधु संत भी चुनाव की तैयारी को लेकर एकजुट हो रहे है । इस संबंध में भाजपा ने भी स्वीकारोक्ती की है उनका कहना है कि साधु संत अगर भाजपा से चुनाव लड़ने की बात कह रहे है इसका मतलब यह है कि वह भी भाजपा से प्रभावित है भाजपा प्रवक्ता राजपाल सिंह सिसोदिया ने ईएमएसटीवी से चर्चा मे कहा कि टिकिट की मांग कोई भी कर सकता है लैकिन टिकिट का अंतिम फैसला भाजपा नेतृत्व ही करेगा । वहीं कांग्रेस प्रवक्ता नरेंद्र सलूजा का कहना है कि इस तरह के संत जो नर्मदा नदी के दोनों तटों पर पेड़-पौधे लगाने के कथित घोटाले का खुलासा करने के लिए निकले थे और बाद में राज्य मंत्री का दर्जा प्राप्त करने के बाद चुप बैठ गए ऐसे लोगो की कांग्रेस पार्टी में कोई जगह नहीं है ।

इन सबके बीच यह बात निकल कर सामने आ रही है कि धर्म के नाम पर राजनीति न करने का संदेश देने वाले यह बाबा अब खुद सत्ता के मद में खोने के लिए चुनाव की बाते कर रहे है लेकिन इनका सफर इतना आसान नहीं है ।