प्राइम टाइम

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Posted by Divyansh Joshi on



25 मार्च सोमवार को कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक के बाद राहुल गांधी जब प्रेस कान्फ्रेंस में आए तो शायद ही किसी को अंदाजा रहा हो कि वे 2019 के लोकसभा चुनाव का संभवतः सबसे बड़ा वादा करने जा रहे हैं। उन्होंने प्रेस कान्फ्रेंस में न्यूनतम आय योजना की घोषणा की। राहुल गांधी ने कहा कि अगर कांग्रेस केंद्र की सत्ता में आती है तो महीने में 12हजार रुपये से कम आय वाले परिवारों को सालाना 72 हजार रुपये यानी हर महीने छह हजार रुपये तक की आर्थिक मदद दी जाएगी। राहुल गांधी ने न्यूनतम आय गारंटी की बात पहली बार की हो, ऐसा नहीं है। इसी साल अंतरिम बजट आने के पहले जब जानकारों में इस बात की सुगबुगाहट थी कि मोदी सरकार बजट में किसी बड़ी लोकलुभावन योजना की घोषणा कर सकती है, तब उन्होंने छत्तीसगढ़ की एक जनसभा में कहा था कि केंद्र में कांग्रेस की सरकार आने पर गरीबी रेखा से नीचे के लोगों को एक निश्चित रकम हर महीने दी जाएगी।कांग्रेस की गणना के मुताबिक, देश में 12000 से कम कमाने वाले करीब पांच करोड परिवार हैं. प्रति परिवार पांच आदमियों के औसत से इसके लाभार्थियों की संख्या 25 करोड़ बताई गई है जो देश की जनसंख्या का करीब 20 फीसदी बैठती है. पहले चरण के चुनाव के लिए नामांकन भरने प्रक्रिया शुरु हो चुकी है. ऐसे में कांग्रेस ने न्यूनतम आय गारंटी की अमूर्त बहस को एक बड़े सियासी वादे में तब्दील कर दिया है.
भाजपा ने कांग्रेस की इस घोषणा को मुंगेरीलाल के सपने दिखाने जैसा बताया है मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष सिर्फ वोट बैंक की राजनीति के लिए मुंगेरी लाल के सपने दिखा रहे है और झूठे वादे कर रहे है।
आर्थिक जानकार कांग्रेस के इस बड़े चुनावी वादे को भारतीय सियासत में लोकलुभावनवाद की वापसी की एक नई और बहुत बड़ी कड़ी के तौर पर देखते हैं. भाजपा सरकार ने भी हाल ही में बजट में किसानों को छह हजार रुपये सालाना देने और कामगारों को पेंशन की योजना का ऐलान किया था. कांग्रेस की ‘न्याय’ योजना भी उसी सिलसिले को एक नये स्तर पर आगे बढ़ाती है. आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि भाजपा और कांग्रेस जैसे बड़े राजनीतिक दलों द्वारा लगातार की जा रही ऐसी योजनाओं की घोषणा से साफ है कि उदारीकरण और आर्थिक सुधार सियासत की प्राथमिकता में नहीं रह गए हैं.आर्थिक जानकारों का कहना है कि कांग्रेस की घोषणा में यह साफ नहीं है कि जिन परिवारों को न्यूनतम आय योजना के तहत लाभ दिया जाएगा, उन्हें पहले से मिल रहे अन्य योजनाओं का लाभ या सब्सिडी मिलेगी या नहीं. इनका मानना है कि अगर कांग्रेस के मोटे-मोटे आंकड़ों को ही आधार मान लें तो साल में 72000 रुपये पांच करोड़ परिवारों को देने में 3लाख60 हजार करोड़ रुपये का सालाना खर्च आएगा. लेकिन, अर्थशास्त्रियों का एक खेमा यह भी मानता है कि अगर न्यूनतम आय योजना (न्याय) के अलावा सरकार अन्य सभी तरह की सब्सिडी बंद कर दे तो ऐसा करना संभव है।