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छत्तीसगढ़ में युवाओं से गोबर उठवा रही सरकार

Posted by khalid on



कांग्रेस ने चुनाव जीतने के लिए छत्तीसगढ़ की युवा पीढ़ी से रोजगार या फिर प्रोत्साहन राशि देने का वादा किया था। ऐसे वादे तो तमाम राजनीतिक दल करते हैं लेकिन इन वादों को किस तरह वफा किया जाता है, इसका सबसे बड़ा नमूना छत्तीसगढ़ में सामने आया है जहां बेरोजगारों की फौज को नया विकल्प मिला है गोबर जुटाओ और सरकार को बेचकर धन कमाओ।
देखिये हमारी खास रिपोर्ट

पहली बार किसी सरकार के दिमाग में यह क्रांतिकारी योजना उपजी है कि गोबर खरीदी के जरिए भी रोजगार का अवसर मिल सकते है । लेकिन छत्तीसगढ़ में गोबर खरीदी का फैसला लेकर यहां के संवेदनशील मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने एक साथ कई मोर्चों पर अपनी दूरदर्शी सोच का परिचय दिया है। गोबर के दाम मिलें तो कोई अपने पशु को आवारा नहीं छोड़ेगा। गोबर खरीदी योजना से ग्रामीण आबादी को आर्थिक संबल मिलेगा। इसके साथ ही इसे लोग रोजगार के तौर पर भी अपना सकते हैं।
छत्तीसगढ़ के पहले त्यौहार हरेली के अवसर पर भारी तामझाम के साथ गोबर खरीदी का श्रीगणेश हो गया। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने गोबर धन के महत्व को समझा और एक पखवाड़े में 46000 गोपालकों को एक करोड़ 67 लाख का भुगतान कर दिया गया। छत्तीसगढ़ में हर 15 रोज में गोबर खरीदी का भुगतान किया जाएगा। योजना के पहले पखवाड़े में भुगतान का जो आंकड़ा सामने आया है उसके मुताबिक प्रति गोपालक 350 रुपये यानी 23 रुपये रोज के हिसाब से मिल रहा है।

बघेल सरकार 2 ₹ किलो की दर से गोबर खरीद रही है जबकि 1 किलो गोबर में अगर कंडे थोपे जाएं तो 12 से 15 ₹ प्रति किलो की आमदनी की जा सकती है। लिहाजा गोबर खरीदी का दायरा उतना शायद ही बढ़ पाए जितनी योजना बनाते समय उम्मीद की गई होगी। रही बात गोबर के जरिए रोजगार के अवसर मिलने की तो क्या अब छत्तीसगढ़ की युवा पीढ़ी गोबर संग्रहण को ही अपना कैरियर बनाएगी? सवाल यह भी है कि 25 से 27 ₹ रोज की गोबर की कमाई से कितनी राहत मिल पाएगी?