प्राइम टाइम

प्राइम टाईम

Posted by Divyansh Joshi on



जिन पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव के बाद बीते महीने नई सरकारों का गठन हुआ है, उनमें मध्य प्रदेश की स्थिति जितनी दिलचस्प पहले थी उतनी ही अब भी बनी हुई है। मध्यप्रदेश में सरकार बनने के बाद कांग्रेस कार्यालय में पहली अनौपचारिक कैबिनेट बैठक के दौरान एक तस्वीर सामने आई .. सबसे पहले आप इस तस्वीर को देखिए। इसे ग़ौर से देखिए. इसमें मुख्यमंत्री कमलनाथ बैठे ज़रूर हैं मगर चुपचाप.. उनके मंत्रियों को दिशानिर्देश देने का काम उनकी बराबरी पर बैठे दिग्विजय सिंह कर रहे हैं. सो, ज़ाहिर तौर नए मंत्रियों की निग़ाह भी दिग्विजय सिंह पर ही टिकी है. अब कहने के लिए तो प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में हुई यह बैठक अनौपचारिक थी, लेकिन यह भविष्य के औपचारिक संकेत कहती-सुनाती दिख रही है। अब इसी तस्वीर के बहाने पीछे की कड़ियां जोड़ते हुए आगे की कुछ तस्वीर बनती है. पीछे की कड़ी यह कि जब बीती मई में कमलनाथ ने प्रदेश कांग्रेस की कमान संभाली थी तब भी ख़बरें यही आई थीं कि वे दिग्विजय सिंह के समर्थन की बदौलत ऐसा कर सके। इसके बाद बिखरे पार्टी संगठन में फिर जान फूंकने के लिए भी कमलनाथ ने दिग्विजय का ही सहयोग लिया. उन्हें पार्टी की चुनाव समन्वय समिति का प्रमुख बनाया. उनकी इस भूमिका का पहला प्रभाव टिकट वितरण में दिखा. लगभग दो तिहाई से ज़्यादा उम्मीदवार दिग्विजय और कमलनाथ के रहे. दिग्विजय के छोटे भाई लक्ष्मण सिंह और पुत्र जयवर्धन पहली सूची में ही टिकट पाने वालों में शुमार कर लिए गए. फिर पार्टी की जीत के बाद जब मुख्यमंत्री चुनने की बारी आई तब भी दिग्विजय का समर्थन ही काम आया और कमलनाथ यह पद हासिल कर सके. यही हाल विभागों के बंटवारे में हुआ. मंत्रिमंडल से सबसे छोटे सदस्य महज़ 32 साल के अपने पुत्र जयवर्धन को दिग्विजय नगरीय प्रशासन जैसा दमदार विभाग दिलाने में कामयाब रहे. वहीं उनके समर्थकों को सहकारिता, पंचायत, ऊर्जा, चिकित्सा शिक्षा, वाणिज्यिक कर और नर्मदा घाटी विकास जैसे सात-आठ बड़े विभाग मिले हैं। वही वरिष्ठ आईएएस सुधि रंजन मोहंती मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव बनाए गए हैं. मोहंती भी दिग्विजय के समर्थक अफ़सरों में गिने जाते हैं. उनकी सरकार में वे जनसंपर्क, चिकित्सा शिक्षा, स्कूल शिक्षा, वित्त निगम जैसे बड़े पदों पर रहे हैं. लेकिन भाजपा सरकार के कार्यकाल में वे बीते 15 साल से लूप लाइन में चले गए थे। इससे यह साबित होता है कि किस तरह कांग्रेस के लिए मिस्टर बंटाधार का तमगा लेने वाले दिग्गी राजा अब मौजूदा सरकार के लिए किंग मेकर बनकर उभरे है और पर्दे के पीछे रहकर ही उन्होने पार्टी के संगठन को मजबूत करने के साथ ही नई कांग्रेस की सरकार को बनाने और बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है ।