व्यक्तित्व

चंदा कोचर - ICICI बैंक को शिखर पर ले जाने वाली महिला बर्खास्त

Posted by Divyansh Joshi on



आईसीआईसीआई बैंक की पूर्व सीईओ व एमडी चंदा कोचर की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं. चंदा कोचर के खिलाफ आईसीआईसीआई बैंक द्वारा की गई आंतरिक जांच में उन्हें बैंक आचार संहिता और कई दूसरे नियमों के उल्लंघन को दोषी माना गया है. ऐसे में बैंक ने उनके इस्तीफे को उनकी ‘बर्खास्तगी’ के रूप में देखने का फैसला किया है. इसका सीधा अर्थ यह है कि चंदा कोचर के साथ अब बैंक द्वारा किसी निकाले गए कर्मचारी की तरह व्यवहार किया जाएगा. चंदा कोचर एक ऐसा नाम है जिसने आईसीआईसीआई बैंक को एक नई उंचाईयों पर पहुंचाया था। उन्हे कई अवार्ड भी मिलें हैं। चंदा कोचर ने अपने करियर की शुरुआत आईसीआईसीआई बैंक में ही मैनेजमेंट ट्रेनी के रुप में शुरु की थी और बाद में इसी बैंक की सीईओ रही। आईसीआईसीआई बैंक भारत का सबसे बड़ा प्राईवेट बैंक और देश का चौथा सबसे बडा बैंक है । उन्हे 2014 में फॉर्च्यून मैगजीन ने एशिया की 25 सबसे ताकतवर महिलाओं की सूची में शामिल किया था। उन्हे प्रतिष्ठित वुडरो विल्सन अवार्ड फोर ग्लोबल कोरपोरेट सिटीजनशिप अवॉर्ड भी मिला है। 17 नवम्बर 1961 को राजस्थान के जोधपुर में जन्मी चंदा, ने मुंबई के जय हिन्द कॉलेज से आर्ट की डिग्री हासिल कर एमबीए किया। कोचर की अगुवाई में आईसीआईसीआई बैंक को 2001 से लेकर 2005 तक लगातार उत्कृष्टता रिटेल बैंकिंग पुरस्कार और 2002 में "सर्वश्रेष्ठ" भारत में रिटेल बैंक अवार्ड मिला है। लेकिन आईसीआईसीआई बैंक द्वारा वीडियोकॉन को 3,250 करोड़ रुपये का लोन देने और इसके बदले में वीडियोकॉन के वेणुगोपाल धूत द्वारा चंदा कोचर के पति दीपक कोचर को कारोबारी फ़ायदा पहुंचाने का आरोप है.लोन का 86 फीसदी हिस्सा यानी लगभग 2810 करोड़ रुपये चुकाया नहीं गया था. इसके बाद, 2017 में आईसीआईसीआई द्वारा वीडियोकॉन के खाते को एनपीए में डाल दिया गया.दिसंबर 2008 में धूत ने दीपक कोचर और चंदा कोचर के दो अन्य रिश्तेदारों के साथ एक कंपनी खोली, उसके बाद इस कंपनी को अपनी एक कंपनी द्वारा 64 करोड़ रुपये का लोन दिया. इसके बाद उस कंपनी का स्वामित्व महज 9 लाख रुपयों में एक ट्रस्ट को सौंप दिया, जिसके प्रमुख दीपक कोचर हैं.