व्यक्तित्व

बाबूलाल गौर - राजनीतिक सफर

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बुधवार का दिन राजनीतिक गलियारे से एक और दुखद खबर लेकर आया है मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और और भाजपा के वरिष्ठ नेता बाबूलाल गौर का निधन होगया उनकी सेहर काफी दिनों से ख़राब चल रही थी बाबूलाल गौर का जन्म 2 जून 1930 को उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में हुआ था। उन्होंने भोपाल की कपड़ा मिल में मजदूरी करते हुए अपनी पढ़ाई पूरी की। भेल में नौकरी करने के दौरान वह कई श्रमिक आंदोलनों से जुड़े और यहीं से उन्होंने ट्रेड यूनियन पॉलिटिक्स में अपनी जड़ें जमाईं। वह भारतीय मजदूर संघ के संस्थापक सदस्य भी रहे। स्कूली दिनों से ही बाबूलाल गौर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शाखा जाया करते थे। 1974 में वह भोपाल से निर्दलीय चुनाव जीते और यहीं से उनके राजनीतिक सफर की शुरुआत हुई। 1974 के बाद से वह लगातार यहां से चुनाव जीतते रहे। वह मार्च 1990 से 1992 तक मध्य प्रदेश के स्थानीय शासन, विधि एवं विधायी कार्य, संसदीय कार्य, जनसंपर्क, नगरीय कल्याण, शहरी आवास तथा पुनर्वास एवं भोपाल गैस त्रासदी राहत मंत्री रहेजून 2016 में बाबूलाल गौर को पार्टी ने उम्र का हवाला देते हुए मंत्री पद छोड़ने को कहा। बीजेपी ने 70 पार उम्र वाले नेताओं को बड़ी जिम्मेदारी न देने का फॉर्म्युला तय किया था। इसके बाद गौर को मंत्री पद छोड़ना पड़ा। तत्कालीन शिवराज सरकार के खिलाफ कई बार उनके बागी तेवर भी देखने को मिले। 2018 के विधानसभा चुनाव से पहले गोविंदपुरा सीट को लेकर वह अड़े हुए थे। 10 बार जीतने के बाद वह 11वीं बार भी इस सीट से टिकट चाहते थे। हालांकि अंतिम क्षणों में बीजेपी ने उनकी बहू कृष्णा गौर को टिकट दिया और चुनाव में जीत हासिल करते हुए बहू ने अपने ससुर की सियासी विरासत को संभाल लिया।