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मकर संक्राति से प्रयागराज कुंभ का आगाज

Posted by Divyansh Joshi on



कुंभ मेला 2019 का आयोजन प्रयागराज में किया जा रहा है, जो जनवरी 14 मकर संक्रांति से शुरू होकर मार्च 04 महाशिवरात्रि तक चलेगा। हिंदू धर्म के अनुसार मान्‍यता है कि किसी भी कुंभ मेले में पवित्र नदी में स्‍नान या तीन डुबकी लगाने से सभी पुराने पाप धुल जाते हैं और मनुष्‍य को जन्म-पुनर्जन्म तथा मृत्यु-मोक्ष की प्राप्‍ति होती है। खास बात ये है कि कुंभ स्‍नान का अद्भुत संयोग करीब तीस सालों बाद बन रहा है। प्रयाग कुंभ मेला अन्य कुंभ मेलाओं की तुलना में सबसे अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि इसके पीछे कुछ आध्यात्मिक कारण हैं। माना जाता है कि यह कुंभ प्रकाश की ओर ले जाता है, यह एक ऐसा स्थान है जहां बुद्धिमत्ता का प्रतीक सूर्य का उदय होता है। यहां जिस स्थान पर कुंभ मेले का आयोजन होता है उसे ब्रह्माण्ड का उद्गम और पृथ्वी का केंद्र माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि ब्रह्माण्ड की रचना से पहले ब्रम्हा जी ने यहीं अश्वमेघ यज्ञ किया था।मान्यता ये भी है कि इस यज्ञ के प्रतीक स्वरुप के तौर पर दश्वमेघ घाट और ब्रम्हेश्वर मंदिर अभी भी यहां मौजूद हैं। इनके कारण भी कुंभ मेले का विशेष महत्व माना जाता है। कुंभ में शामिल होने के लिए 14 अखाड़ों की पेशवाई भी निकाली जाती है। पेशवाई यहां अखाड़ों के कुंभ में धूमधाम से पहुंचने को कहते हैं। अब तक कुंभ में 13 अखाड़े शामिल होते थे लेकिन इस बार एक अखाड़े को शामिल किया गया है। इस बार प्रयाग कुंभ में पहली बार किन्नर अखाड़े को शामिल किया गया। इस अखाड़े में करीब 2500 साधु और संन्यासियों के पहुंचने का अनुमान है। किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर लक्ष्मीनारायण त्रिपाठी हैं। देश-विदेश के कोने से आने वालों के लिए कुम्भ में पहुंचना मुश्किल नहीं है। बस, ट्रेन और फ्लाइट सब तरह की व्यवस्था यहाँ पहुचने केलिए मौजूद है। यूपी सरकार ने भी कुम्भ तक पहुचनें और ठहरनेके लिए काफी पुख्ता इंतज़ाम किये हैं।