व्यक्तित्व

यह तीन लोग सुलझाएंगे आयोध्या विवाद

Posted by Divyansh Joshi on



सुप्रीम कोर्ट ने राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद मामले में शुक्रवार को महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए मध्यस्थता के जरिए इस मसले को सुलझाने का आदेश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने इसके लिए तीन मध्यस्थों को लेकर एक पैनल का गठन किया है। पैनल में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस फकीर मुहम्मद इब्राहिम कलीफुल्ला, आर्ट ऑफ लिविंग के प्रमुख श्रीश्री रविशंकर और वरिष्ठ अधिवक्ता श्रीराम पंचू को रखा गया है। अयोध्या विवाद को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने जिस शख्स की अगुवाई में तीन सदस्यी पैनल का गठन किया है। उनका नाम कीर मुहम्मद इब्राहिम कलीफुल्ला है। 20 अगस्त 1 975 को अपने करियर की शुरुआत करने वाले कलीफुल्ला को पहले मद्रास हाईकोर्ट में स्थाई न्यायाधीश नियुक्त किया गया। 2000 में उनको सुप्रीम कोर्ट में बतौर जस्टिस नियुक्त किया गया, जबकि 2011 को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश बनाया गया था। आध्यात्मिक गुरु और आर्ट्स ऑफ लिविंग के प्रमुख श्री श्री रविशंकर को सुप्रीम कोर्ट के इस पैनल में रखा गया है। हालांकि इससे पहले 2017 में भी रविशंकर अयोध्या मामले में मध्यस्थता का प्रयास कर चुके हैं। यहां तक कि उन्होंने अयोध्या जाकर और पक्षकारों से मुलाकात भी की थी। उन्हें भारत सरकार ने 2016 में पद्मविभूषण से सम्मानित किया था। श्रीराम पंचू एक वरिष्ठ वकील हैं और कई मामलों में मध्यस्थता की भूमिका निभा चुके हैं। वह मध्यस्थता चेंबर के संस्थापक हैं जो किसी भी मामले में मध्यस्थता की सेवा प्रदान करते हैं। वह एसोसिएशन ऑफ इंडियन मीडिएटर के अध्यक्ष और इंटरनेशनल मीडिएशन इंस्टीट्यूट के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर के सदस्य हैं। उन्होंने 2005 में भारत का पहला अदालत द्वारा मध्यस्थता केंद्र स्थापित किया था और मध्यस्थता को भारत की कानूनी प्रणाली का हिस्सा बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उन्होंने भारत के विभिन्न हिस्सों में वाणिज्यिक, कॉर्पोरेट और अनुबंध संबंधी कई बड़े और पेचीदा मामलों में मध्यस्थता की भूमिका निभाई है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा मध्यस्थता के लिए बनी कमेटी के चेयरमैन पूर्व जस्टिस फकीर मोहम्मद इब्राहिम कलीफुल्ला होंगे। जबकि श्रीश्री रविशंकर और श्रीराम पंचू इसके सदस्य होंगे। इस कमेटी के सामने हिंदू और मुस्लिम दोनों पक्षकार अपनी बातें रखेंगे। इसके बाद ये कमेटी अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट के सामने रखी जाएगा।