व्यक्तित्व

दिग्विजय सिंह - भारतीय राजनीति के महानायक

Posted by Divyansh Joshi on



दिग्विजय सिंह एक ऐसा नाम, जिसने राजनीति को उस शिखर पर पहुंचाया जिसे शायद ही कोई दूसरा राजनीतिकज्ञ पहुंचा सकता था। राजनीति और दिग्विजय दोनों एक दूसरे के पर्याय है। दबंग छवि, वाकपटुता में माहिर और राजनीति के एक एक पहलू से वाकिफ दिग्विजय का कोई सानी नहीं है । दिग्गी राजा और राजा साहब के नाम से मशहूर दिग्विजय जहां भी जाते हैं, वहां एक अलग छवि बनाकर आते हैं। 15 सालों से सत्ता से दूर रही कांग्रेस को भी मध्यप्रदेश में सत्ता दिलाने के पीछे दिग्विजय का ही हाथ माना जाता है। उन्हे प्रदेश सरकार के पर्दे के पीछे का नायक कहा जाता है। कांग्रेस के नाम जहां भी आता है वहां सबसे पहले लोग दिग्विजय की ही शख्सियत याद करते है। उनके पास सूचनाओं का इतना शानदार तंत्र है जो वह कहते है उसे साबित कर दिखाते है , इसलिए विपक्षी पार्टियां भी उन्हे गंभीरता से लेती है । दिग्विजय अपने एक एक कार्य़कर्ता को नाम से जानते हैं। जहां भी जाते है सबसे बड़े प्यार से मिलते है । 28 फरवरी 1947 को 1947 को राघोगढ़ के राजा बलभद्र सिंह के घर उनका जन्म हुआ। उनके पिता जनसंघ के पूर्व सांसद थे।वर्तमान में वह कांग्रेस के महासचिव हैं। दिग्विजय ने प्राम्भिक शिक्षा डेली कॉलेज इंदौर से प्राप्त की। इसके बाद श्री गोविन्दराम सेकसरिया प्रौद्योगिकी एवं विज्ञान संस्थान, इंदौर से ही इंजीनियरिंग की।दिग्विजय सक्रिय राजनीति में 1971 में आये, जब वह राघोगढ नगरपालिका अध्यक्ष बने। 1977 में काँग्रेस टिकट पर चुनाव जीत कर राघोगढ़ विधान सभा क्षेत्र से विधान सभा सदस्य बने। 1980 में वापस राघोगढ़ से चुनाव जीतने के बाद दिग्विजय को अर्जुन सिंह मंत्रिमंडल में राज्यमंत्री का पद दिया गया तथा बाद में कृषि विभाग दिया गया। वह मध्यप्रदेश के नौवें मुख्यमंत्री थे। वह इस पद पर 1993 से 2003 तक रहे।दिग्विजय सिंह शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती महाराज से सलाह मश्वरे के लिए अक्सर ही नरसिंहपुर के गाडरवारा स्थित उनके आश्रम आते रहते हैं। बताया जाता है कि दिग्गी के जीवन में इनका आशीर्वाद खासा महत्व रखता है।