प्राइम टाइम

प्राइम टाइम - अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले का सार

Posted by Avneesh Rai on



अयोध्या विवाद मध्यकाल के इतिहास से जुड़ा ऐसा मसला है जिसने आधुनिक भारत में भी सियासत से लेकर सामाजिक ताने-बाने को प्रभावित करने का काम किया है. 1992 में विवादित ढांचा ढहाए जाने से कुछ समय पहले से अयोध्या देश-दुनिया में जाना जाने लगा और राम मंदिर आंदोलन से जुड़े राजनेताओं और साधु-संतों के साथ बाबरी मस्जिद के पक्षकारों के नाम और काम, सुर्खियों का हिस्सा बनते रहे.सर्वाेच्च अदालत कि पांच जजों की पीठ ने देश के सबसे बड़े विवादित अयोध्या मामले में अपना फैसला सुनाते हुए रामलला के दावे को स्वीकार करते हुए विवादित जमीन, रामलला को सौपे जाने का आदेश जारी किया है । इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष को अन्य स्थल पर 5 एकड़ जमीन देने का आदेश जारी किया है, जो विवादित स्थल क्षेत्र से करीब 2 गुना है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि केन्द्र सरकार 1993 में अधिग्रहीत 67 एकड़ ज़मीन में से सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड को आवंटित करेगी अथवा राज्य सरकार अयोध्या के किसी उपयुक्त और प्रमुख स्थान पर यह ज़मीन आवंटित करेगी.कोर्ट ने यह भी कहा है कि ​सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड इस ज़मीन पर मस्जिद बनाने के लिए ज़रूरी क़दम उठाने को स्वतंत्र होगा अर्थात उस पर कोई बाधा नहीं डाली जाएगी जजमेंट में यह भी कहा गया है कि सबसे पहला मुक़दमा दायर करने वाले हिन्दू महासभा के नेता रामगोपाल विशारद को मंदिर में पूजा का अधिकार होगा. उन्होंने सन 1949 में मस्जिद में मूर्तियां रखे जाने के बाद यह अधिकार मांगा था.कोर्ट ने भगवान राम लला विराजमान का दावा मंज़ूर करते हुए केन्द्र सरकार को निर्देश दिया है कि वह जजमेंट के तीन महीने के अंदर मंदिर निर्माण के लिए एक कार्य योजना प्रस्तुत करे.ऐतिहासिक यात्रा वृतांतों का हवाला देकर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सदियों से मान्यता रही है कि अयोध्या ही राम का जन्मस्थान है. । सुन्नी वक्फ बोर्ड की ओर से जफर फारुकी ने कहा कि बोर्ड अयोध्या विवाद पर आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर पुनर्विचार याचिका दायर नहीं करेगा. बोर्ड की ओर से फैसले का स्वागत किया गया है और उन्होंने कहा कि हम पहले से कह चुके हैं कि सुप्रीम कोर्ट का जो भी फैसला आएगा उसे दिल से माना जाएगा.