व्यक्तित्व

निधन इरफान खान- छोटे शहर से बड़े सपनों तक की उड़ान का सफर

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कोरोना महामारी और लॉकडाउन के बीच सबसे बुरी खबर सामने आई हैं। बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता इरफान खान को आज हमने खो दिया है। 53 वर्षीय अभिनेता को मंगलवार को कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। नशीली आंखों से अभिनय करने वाले इस साधारण एक्टर ने बिना गॉडफादर के फिल्म इंडस्ट्री में वो जगह बनाई जिसे बना पाना किसी स्टार किड के बस की बात भी नही थी । इरफ़ान लंबे समय से एक दुलर्भ किस्म के कैंसर से जंग लड़ रहे थे. इरफान को साल 2018 में न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर हुआ था. इस बीमारी के इलाज के लिए इरफान खान लंदन भी गए थे और करीब साल भर इलाज कराने के बाद वह वापस भारत लौटे थे। लौटने के बाद वो कोकिलाबेन अस्पताल के डॉक्टरों की देखरेख में ही ट्रीटमेंट और रुटीन चेकअप करवा रहे थे । जिसके बाद उन्होने फ़िल्म 'अंग्रेजी मीडियम' की शूटिंग की जो इरफान के आखिरी फिल्म भी है । मंगलवार को एक बार फिर तबीयत ख़राब होने पर उन्हें कोकिलाबेन अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां उन्होंने अपनी आखिरी सांसे लीं। इरफान खान की इस खबर के बाद पूरे बॉलीवुड में शोक के लहर दौड़ गई है. ।
इरफान खान के परिवार में पत्नी सुतापा और दो बेटे बाबिल और अयान हैं । साधारण से दिखने वाले, बड़ी बड़ी नशीली आंखों वाले इरफान को देखकर शायद ही कोई इस बात का अंदाज़ा लगा सके कि यह भारतीय सिनेमा के बेहतरीन एक्टर में अपनी जगह बना लेंगे। राजस्थान के जयपुर के रहने वाले इरफ़ान के पिता का टायर का कारोबार था, जिसे वह चाहते थे कि इरफान आगे बढाए लेकिन इरफान क्रिकेटर बनना चाहते थे, लेकिन एक दिन थियेटर करने की ठान ली। थियेटर से टीवी,टीवी से फिल्म तक के इस सफर में इरफान ने कई छोटे - बड़े रोल किए। उनको पहला मौका साल 1988 में आई मीरा नायर की फिल्म ‘सलाम बॉम्बे’ में मिला। हालांकि फिल्म में रोल तो छोटा था, लेकिन इस रोल से पहचान बड़ी मिली। हिन्दी फिल्मों में लीड रोल मिलने के लिए उन्हे अपनी लड़ाई जारी रखनी पड़ी और आखिरकार साल 2005 में उन्हे फिल्म रोग में लीड एक्टर के तौर पर कास्ट किया गया। बतौर लीड पाने का यह सफर लगभग 17 साल लंबा रहा। इरफान ने 'मकबूल', 'लाइफ इन अ मेट्रो', 'द लंच बॉक्स', 'पीकू', 'तलवार' और 'हिंदी मीडियम' जैसी फिल्मों में काम किया। उन्हें 'हासिल' , 'लाइफ इन अ मेट्रो', 'पान सिंह तोमर' और 'हिंदी मीडियम' के लिए फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला। 'पान सिंह तोमर' के लिए उन्हें नेशनल अवॉर्ड दिया गया था। कला के क्षेत्र में उन्हें देश का चौथा सबसे बड़ा सम्मान पद्मश्री भी दिया । इतना ही नहीं इरफान ने हालीवुड में भी अपनी पहचान बनाई । साल 2006 में उन्होनें आसिफ़ कपाड़िया की फिल्म द वॉरियर से अपने अंतराष्ट्रीय करियर की शुरुआत की। इस फिल्म में बाद उन्होनें मुड़ कर नहीं देखा। द नेमसेक, ए माइटी हार्ट, स्लमडॉग मिलिनेयर, द अमेजिंग स्पाइडर मैन जैसी फिल्मों से अपनी पहचान हॉलीवुड में भी बनाई। भारतीय सिनेमा में कोई ओर कलाकार नहीं, जिसने इतनी सारी हॉलीवुड फिल्में की हो।

ज़ाहिर है जिस कलाकार को अपने टैलेंट के माध्यम में बॉलीवुड में लीड रोल पाने में इतना समय लगा, उसने अपने टैलेंट के भरोसे आखिरकार दुनियाभर में पहचान बना ली। इरफान को पतंगबाजी में भी काफी दिलचस्पी थी. वो वक्त निकालकर जयपुर में खास तौर पर पतंगबाजी के लिए आते थे. पतंगबाजी के अलावा इरफान खान को क्रिकेट का भी बड़ा शौक था. इरफान के दोस्त बताते हैं कि स्कूल से आते ही इरफान क्रिकेट खेलने के लिए निकल जाते थे.