प्राइम टाइम

प्राइम टाइम

Posted by khalid on



लोकसभा चुनाव की तारीखे नजदीक है। मध्यप्रदेश लोकसभा चुनाव केंद्र है क्योंकि पिछले 15 साल से सत्ता में काबिज बीजेपी को यहां हार मिली और कमलनाथ के नेतृत्व में नई कांग्रेस सरकार बनी। बात कमलनाथ की करतेहै। कमलनाथ छिंदवाड़ा से मौजूदा सांसद है और प्रदेश के मुख्यमंत्री है । मुख्यमंत्री बने रहने के लिए उन्हे विधायक का चुनाव लड़ना है। हालांकि सीएम कमलनाथ छिंदवाड़ा से विधानसभा का उपचुनाव लड़ेगे। बात करेंगे छिंदवाड़ा की , तो छिंदवाड़ा अब पूरे देश की राजनीति में केंद्र बन गया है। यह संभवतह ऐसी सीट बन गई है जहां से पिता पुत्र एक साथ एक ही दिन चुनाव लड़ रहे है। एआईसूीसी ने छिंदवाड़ा के लिए कमलनाथ के पुत्र नकुलनाथ का नाम फाईनल किया है। और अब यह पिता पुत्र 29 अप्रेल को चुनाव लड़ेगे। कांग्रेस के गढ़ के रूप में पहचाने जाने वाला छिंदवाड़ा जिला इस बार नया इतिहास बनाने की तैयारी में है। मुख्यमंत्री कमलनाथ विधानसभा उपचुनाव और उनके बेटे नकुलनाथ लोकसभा चुनाव के लिए आगामी नौ अप्रैल को नामांकम दाखिल करेंगें। इस दिन छिंदवाड़ा में वे एक जनसभा संबोधित कर रोड शो करेंगे। यह पहला मौका होगा जब पिता-पुत्र एक ही जगह से दो अलग अलग चुनाव लड़ेंगें। कमलनाथ पहली बार विधानसभा उपचुनाव लड़ रहे है, वे विधानसभा का सदस्य बनने के लिए उपचुनाव लड़ेंगें। उनके लिए कांग्रेस नेता दीपक सक्सेना ने अपनी सीट खाली की है। नियमों के अनुसार, सीएम बनने के बाद छह महिने के अंदर विधानसभा का सदस्य होना अनिवार्य है। वही नकुल पहली बार पिता की जगह लोकसभा चुनाव लड़ेंगें ।
अब यहां एक इंट्रेस्टिंग बात है कि इस चुनाव में पिता पुत्र को वोट दे सकेंगे लेकिन पुत्र नकुलनाथ अपने पिता को नहीं। क्यों, क्योंकि इसके पीछे वजह यह है कि कमलनाथ का निवास शिकारपुर छिंदवाड़ा शहर के समीप ही है, लेकिन तकनीकी रूप से वह सौंसर विधानसभा के दायरे में आता है। इसलिए कमलनाथ और उनका परिवार सौंसर विधानसभा क्षेत्र के मतदाता हैं, जबकि कमलनाथ स्वयं छिंदवाड़ा विधानसभा क्षेत्र से प्रत्याशी हैं। इस तरह कमलनाथ स्वयं अपने लिए भी वोट नहीं दे पाएंगे और नकुल भी उन्हें वोट नहीं कर पाएंगे, लेकिन लोकसभा चुनाव के लिए कमलनाथ अपने पुत्र कांग्रेस प्रत्याशी नकुल को जरूर वोट दे सकेंगे। छिंदवाड़ा एक ऐसा क्षैत्र है जो कांग्रेस का गढ़ है 2014 मे मोदी लहर होने के बावजूद यहां से कमलनाथ ही चुनाव जीते थे। इस बार कमलनाथ ने पूरे प्रदेश में 22 से ज्यादा सीटें लाने की बात कही है । कमलनाथ को मैनेजमेंट हम विधानसभा चुनाव में देख ही चुके है और अगर इस बार कमलनाथ 22 सीटों की बात कर रहे है तो इसे विपक्ष को हल्के में नहीं लेना चाहिए।