प्राइम टाइम

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Posted by Divyansh Joshi on



इसमें कोई शक नहीं है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ख़िलाफ़ धरने पर बैठने के बाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के राजनीतिक क़द में बढ़ोतरी हुई है.ममता बनर्जी लोकसभा चुनावों के लिए बनाई अपनी रणनीति के तहत धीरे-धीरे क़दम बढ़ा रही हैं ताकि वह नरेंद्र मोदी को पटखनी देकर प्रधानमंत्री पद पर बैठ सकें.शारदा चिटफ़ंड घोटाले के मामले में कोलकाता के पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार से सीबीआई की पूछताछ के ख़िलाफ़ धरने पर बैठना भी राष्ट्रीय राजनीति में आने की ओर उठाया गया एक क़दम है.सीबीआई ने राजीव कुमार पर शारदा चिटफ़ंड मामले में सुबूतों को नष्ट करने का आरोप लगाया है.इस मामले में ममता बनर्जी इसप्लानाडे इलाक़े के मेट्रो चैनल पर धरने पर बैठी. यह वही जगह है जहां पर साल 2006 में उन्होंने सिंगूर में टाटा मोटर्स की फैक्ट्री के लिए खेती की ज़मीन के अधिग्रहण के ख़िलाफ़ धरना दिया था.हालांकि, इस समय विपक्ष में प्रधानमंत्री पद के लिए कई उम्मीदवार हैं. लेकिन अभी तक विपक्षी दलों में किसी एक चेहरे के लिए आम सहमति नहीं बनी है.लेकिन ममता बनर्जी ने अपनी जगह राहुल गांधी और शरद पवार जैसे उम्मीदवारों के साथ पहली पंक्ति में बना ली है.ममता बनर्जी ने अपनी इस लड़ाई में विपक्षी दलों का समर्थन हासिल किया है, लेकिन ये ममता बनर्जी की एक ख़ास छवि की वजह से हुआ है जो उन्होंने बीते कई सालों में बनाई है.साल 2014 से ममता बनर्जी मोदी सरकार के ख़िलाफ़ अपना मोर्चा खोले हुए हैं. इसमें गोहत्या से लेकर गोमांस पर प्रतिबंध, जीएसटी, नोटबंदी और कई अन्य विवादास्पद मुद्दे शामिल हैं.ममता ने अपनी छवि एक ऐसे विद्रोही नेता के रूप में बनाई है जो कि देश के लिए संघर्ष कर सकती हैं.ऐसे में एक ऐसी महिला की छवि, जो कि शक्ति के प्रति आसक्त नहीं है, इन सबने ममता बनर्जी की काफ़ी मदद की है.इसके साथ ही उन्होंने युवाओं को लुभाने में सफलता हासिल की है, और युवा शक्ति ही राजनीति में ममता बनर्जी की मदद करती है.हालांकि, ममता बनर्जी के लिए प्रधानमंत्री पद की उम्मीदवारी के लिए दूसरे नेताओं का समर्थन हासिल करना एक चुनौती होगा क्योंकि वे भी अपने आपको प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार मानते हैं.ऐसे में ममता बनर्जी की महत्वाकांक्षाएं चाहें जो भी हों लेकिन फ़िलहाल के लिए उन्होंने अपने आपको बीजेपी-विरोधी गुट के प्रमुख के रूप में पेश कर दिया है।