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राजनीतिक विश्लेषण अपने ही श्राप से शापित प्रज्ञा

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भारतीय जनता पार्टी की लोकसभा प्रत्याशी साध्वी प्रज्ञा ठाकुर ने मुंबई हमले में शहीद हेमंत करकरे के विषय में विवादास्पद बयान देकर अपनी ही मुश्किलें बढ़ा दी हैं और कांग्रेस प्रत्याशी दिग्विजय सिंह के लिए एक राहत का पैगाम दे दिया है। जब भाजपा ने साध्वी प्रज्ञा को दिग्गज कांग्रेसी दिग्विजय सिंह के सामने मैदान में उतारा तो ध्रुवीकरण की राजनीति की चर्चाएं चरम पर पहुंच गई थी। साध्वी प्रज्ञा प्रखर हिंदू वाद के नाम पर मैदान में हैं तो दिग्विजय सिंह साफ्ट हिंदुत्व की कांग्रेसी राजनीति के तहत यह कोशिश करेंगे की न केवल मुस्लिम समुदाय के वोट कांग्रेस के खाते में आए बल्कि उदारवादी हिंदुओं को भी कट्टर हिंदुत्व की राह पर जाने से रोका जाए। प्रखर हिंदुत्व का बड़ा चेहरा मानी जाने वाली प्रज्ञा ने दिग्विजय सिंह को सीधी चुनौती दी, वहां तक तो ठीक था लेकिन उन्होंने जैसे ही मुंबई हमले के शहीद हेमंत करकरे को अपने श्राप का शिकार बताने की राजनीतिक गलती की, वैसे ही सारा मामला उलझ गया।विवादास्पद बयान के संदर्भ में भारत निर्वाचन आयोग साध्वी प्रज्ञा को नोटिस जारी कर चुका है लेकिन बात केवल यह नहीं असल परेशानी यह है की राष्ट्रवाद के नाम पर भाजपा पूरे देश में कांग्रेस पर भारी पड़ रही है उसी का तोड़ साध्वी प्रज्ञा ने कांग्रेस को थमा दिया है।अब कांग्रेस की ओर से जवाबी हमला किया जा रहा है। वैसे भाजपा ने प्रज्ञा के बयान से किनारा कर लिया और खुद प्रज्ञा ने भी अपने बयान को अपनी व्यक्तिगत पीड़ा बताते हुए माफी भी मांग ली है किंतु तब भी दिग्विजय सिंह को भाजपा के राष्ट्रवाद पर हमला बोलने का ऐसा मौका मिला है कि वह अपनी चुनावी संभावनाएं पुख्ता बना सकते हैं। इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साध्वी प्रज्ञा के बचाव में जो तर्क दिए हैं, वह अपनी जगह हैं लेकिन जहां तक भोपाल सीट पर कांग्रेसी रणनीति का सवाल है तो अब भाजपा साध्वी के बयानों को लेकर बचाव की मुद्रा में नजर आ रही है। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने स्तर पर मामले को संभालने की भरपूर कोशिश की है लेकिन जिस तरह से उन्होंने बात को स्पष्ट किया है वैसा माद्दा भाजपा के स्थानीय नेताओं में तो नहीं है। जबकि दिग्विजय इस मामले में वन मैन आर्मी से कम नहीं हैं। चुनाव मैदान में उतरते ही साध्वी प्रज्ञा ने जिस तरह हवा में गेंद उछाल दी उसे कांग्रेस ने लपक लिया है। अब यह फैसला तो जनता ही करेगी की गेंद जमीन से छू गई या नो बाल थी।