प्राइम टाइम

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Posted by Divyansh Joshi on



हाल ही में जारी हुए स्वच्छता सर्वेक्षण 2019में इंदौर ने बाजी मारी है वहीँ भोपाल देश के स्वच्छ शहरों में दूसरे पायदान से 19वें पायदान पर पहुंच गया।हालांकि भोपाल ने देश के सबसे स्वच्छ राजधानी का गौरव बनाए रखा लेकिन ऐसी क्या वजह रही की भोपाल दूसरे पायदान से लुढ़कर 19 वे पायदान पे चला गया है। स्वच्छता सर्वेक्षण 2019 में नगर निगम भोपाल पहले पायदान की तैयारी में जुटा था। बीते वर्ष दूसरे पायदान का सम्मान लगातार दूसरी बार पाने के बाद तत्कालीन कमिश्नर प्रियंका दास ने पहले पायदान पर आने की चुनौती ले रखी थी। निगम का पूरा तंत्र अपने-अपने स्तर पर जुट भी गया था। 25 मई 2018 को प्रियंका दास का तबादला हो गया और निगम की कमान अविनाश लवानिया के हाथों में आ गई। अभी लवानिया रफ्तार पकड़ ही पाए थे कि दिसंबर 2018 में वे भी रवाना हो गए और बी विजय दत्ता नए कमिश्नर बना दिए गए। वे शहर भी पूरा नहीं घूम पाए थे कि स्वच्छता सर्वेक्षण 2019 की टीम भोपाल पहुंच गई। वहीँ लगातार तीन सालों से स्वच्छता का जिम्मा अपर आयुक्त एमपी सिंह ने संभाला। लेकिन आचार संहिता के दौरान उनका तबादला हो गया। स्वच्छता की तैयारियों के लिए उन्हें फिर से नगर निगम में भेजा गया। इस बीच दो महीने स्वच्छता के काम प्रभावित रहे। सर्वेक्षण समाप्त होने के बाद सिंह का फिर से तबादला हो गया। इसके अलवा विधानसभा चुनाव के दौरान निगम अधिकारियों व कर्मचारी चुनाव ड्यूटी में व्यस्त रहे। इस दौरान स्वच्छता पर फोकस कम रहा। आचार संहिता के कारण स्वच्छता संबंधी कामों के टेंडर में भी देरी हुई। दूसरी और इस बार जनप्रतिनिधि द्वारा स्वच्छता का संदेश लेकर जनता के बीच कोई नहीं गया। आदमपुर छावनी में कचरे से बिजली बनाने का प्लांट चालू नहीं हो पाया। जबकि वर्ष 2019 में बिजली बनाने का काम शुरू किया जाना था। जिसके चलते इसके अंक नहीं मिले । खुले में कचरा फेंकने और खुले में शौच को रोकने जैसा कोई अभियान भी नहीं चलाया गया। वहीं केंद्र सरकार ने इस बार सर्वेक्षण का फार्मेट भी बदल दिया था कुल 12 बिंदुओं वाले इस फार्मेट में खरा उतरने के लिए भोपाल को कड़ी मेहनत करने की जरूरत थी । चौथे स्वच्छता सर्वेक्षण की सभी कार्रवाई इस बार 31 जनवरी तक पूरी हो गई और मार्च में परिणाम जारी हो गये । कुलमिलाकर यह कहा जा सकता है की बार-बार कमिश्नर के तबादलों और नगर निगम की लापरवाही की वजह से भोपाल में स्वच्छता का काम प्रभावित हुआ। इसलिए शहर पिछड़ गया।