प्राइम टाइम

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Posted by Divyansh Joshi on



साल 2019 कई मामलों मे अहम है । इसमें जो सबसे अहम मामला या मुद्दा है वह लोकसभा चुनाव का है या यूं कहें लोकसभा चुनाव 2019 का सबसे बड़ा मुद्दा होगा । क्यों क्योंकि 2014 में लोगो को सपने दिखाकर प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में आई भाजपा के पास इस बार कोई मुद्दा नहीं है । क्योंकि भाजपा अपने पुराने मुद्दो का समाधान ही नहीं किया है इसलिए देश की जनता भी यह जान रही है । इस बार चुनाव में कुच मुद्दा नहीं था तो भाजपा शासित केंद्र सरकार ने सवर्ण आरक्षण को मुद्दा बना लिया है। इसमें एक नया सपना दिखाया जा रहा है - ‘एक नये आरक्षण का सपना’, जिसको लेकर अब बहुत बहस चल रही है। हमारे संविधान में कहीं भी आर्थिक आधार पर आरक्षण दिए जाने का कोई प्रावधान नहीं है. अनुच्छेद 15 और 16 सिर्फ़ ‘सामाजिक और शैक्षणिक’ रूप से पिछड़े समुदाय को आरक्षण देने की बात करते हैं. ऐसा इसलिए है क्योंकि हमारे संविधान निर्माताओं ने माना है कि ‘आरक्षण कोई ग़रीबी उन्मूलन कार्यक्रम नहीं है. लिहाज़ा इसका आधार आर्थिक पिछड़ापन नहीं बल्कि सामाजिक और शैक्षणिक पिछड़ापन होगा.’इससे इतना तो साफ़ है कि अगर सरकार आर्थिक आधार पर आरक्षण देना चाहती है तो पहले उसे संविधान में संशोधन करना होगा. सरकार ने इससे जुड़ा विधेयक लोकसभा में पारित करवा लिया है. जिस तरह का समर्थन इसे वहां मिला है उसे देखते हुए कहा जा सकता है कि इसे राज्यसभा में भी ज्यादा मुश्किल नहीं होने वाली.लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि आगे इसकी राह में बस फूल ही फूल हैं. यह पहली बार नहीं है जब कोई सरकार आर्थिक आधार पर आरक्षण देने की बात कर रही है. मंडल कमीशन लागू होने के बाद जब आरक्षण का ज़बरदस्त विरोध हुआ था, तब भी तत्कालीन सरकार ने दस प्रतिशत आरक्षण आर्थिक आधार पर देने की बात कही थी. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने तुरंत ही उसके इस फ़ैसले को लंगड़ी मार दी थी. कई राज्यों ने भी समय-समय पर ऐसा आर्थिक आरक्षण देने के प्रयास किए जो विफल रहे. अगर मोदी सरकार की इस कोशिश को संसद की मंजूरी मिल जाती है तो उसे आगे जाकर इस मसले पर सुप्रीम कोर्ट से भी निपटना ही होगा. अब अगर यह भी मान लें कि सुप्रीम कोर्ट भी इस मामले में कोई हस्तक्षेप नहीं करता और ‘ग़रीब सवर्ण’ आरक्षण का पात्र बन जाता है । इस सभी पहलुओं पर चर्चा करने के बाद यह तो समझ आ गया कि गरीब सवर्ण आरक्षण सरकार के लिए इतना आसान नहीं है जितना उन्हे लग रहा है ।