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खबरें इतिहास की- बैंकों का राष्ट्रीयकरण और गरीबी हटाओ

Posted by khalid on



पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी 1966 में भारत की प्रधानमंत्री बनी। स्वतंत्रता के समय से ही भारत में भारी गरीबी थी। लोगों को दो टाइम का भोजन आसानी से उपलब्ध नहीं होता था। स्वतंत्रता प्राप्त होने के बाद भारत में उद्योग धंधे बहुत सीमित थे। केवल कृषि कार्यों से ही भारत के लोगों का जीवन यापन होता था। भारत की जनसंख्या हर साल तेजी के साथ बढ़ रही थी। गरीबों की हालत बड़ी दयनीय थी। 1962 में चीन के साथ भारत का युद्ध तथा 1965 में पाकिस्तान के साथ भारत के युद्ध ने भारत की आर्थिक व्यवस्था को जीर्ण शीर्ण अवस्था में पहुंचा दिया था। उसी समय भारत में कई सालों तक लगातार अकाल पड़ा था। जिसके कारण लोगों को, विशेष रुप से गरीबों को पेट भरने के लिए खाद्यान्न भी उपलब्ध नहीं था।भारत अकाल की विभीषिका से जूझ रहा था। उसी समय युद्ध के लिए सेना को सुसज्जित करने और हथियारों के लिए सरकार को भारी आर्थिक संकट से गुजरना पड़ रहा था। भारत में बड़ी गरीबी फैली हुई थी। 1966 में काफी चुनौतीपूर्ण स्थितियों में इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री बनी। प्रधानमंत्री बनने के बाद उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता सीमाओं को सुरक्षित करना, गरीबों को दो टाइम का भोजन उपलब्ध कराना, भारत को आर्थिक दृष्टि से मजबूत बनाना और कृषि के क्षेत्र में भारत आत्मनिर्भर बने। इसको लेकर उन्होंने उस समय जो भी निर्णय लिए। उसकी बड़ी तीव्र प्रतिक्रिया कांग्रेस पार्टी, विपक्ष एवं राजा महाराजाओं के बीच हुई।
बैंकों का राष्ट्रीयकरण ऐसा महत्वपूर्ण निर्णय था। जिसने भारत की आर्थिक एवं सामाजिक व्यवस्था को बेहतर बनाने का काम किया। जिसने देश की तस्वीर को बदलने का काम किया। बैंकों के राष्ट्रीयकरण का परिणाम हम आज भी देख रहे हैं। इंदिरा गांधी ने 19 जुलाई 1969 को 14 बैंकों का राष्ट्रीयकरण करके बैंकों को आम जनता के लिए पहली बार खोलने का काम किया। पहली बार गरीबों को आजीविका के लिए बिना किसी जमानत के बहुत आसान किस्तों में, गरीबों,ठेले वालों, छोटे-छोटे किसानों और छोटे-छोटे रोजगार करने वालों को बैंकों से कम ब्याज दर पर लोन मिलना शुरू हुआ। राष्ट्रीयकरण के पूर्व बैंकों पर बड़े बड़े औद्योगिक घरानों और राजे रजवाड़ों का कब्जा था।
बैंकों के राष्ट्रीयकरण होने के बाद भारत के किसानों मजदूरों छोटे छोटे व्यापारियों तथा कुटीर उद्योग चलाने वाले लोगों के जीवन में अमूल चामुल परिवर्तन आया। यह उस समय की एक महत्वपूर्ण निर्णय था। सरकार के एक निर्णय से आम जनता के बीच एक नया विश्वास जागा। उस समय इसे एक क्रांतिकारी घटना माना गया। छोटे-छोटे धंधे करने वाले, रिक्शा चलाने वाले, छोटे छोटे उद्यमियों को पहली बार बैंकों से बहुत कम ब्याज दर पर बिना किसी जमानत के लोन मिला। इससे गरीबों के जीवन में आर्थिक एवं सामाजिक परिवर्तन आया। वहीं दूसरी ओर बैंकों में जमा धन देश के विकास कार्यों के लिए सरकार को धन उपलब्ध हुआ। जिसके कारण पंचवर्षीय योजनाओं के लिए ज्यादा धन सरकार को मिला। इंदिरा गांधी के इस निर्णय से बड़े-बड़े उद्योगपति और राजा रजवाड़े इंदिरा गांधी से नाराज हो गए। इसका खामियाजा इंदिरा गांधी को राजनीतिक चुनौतियों के रूप में उठाना पड़ा। बहुत सारे राजा महाराजा जो कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़ते थे, उन्होंने कांग्रेस छोड़ दी। कांग्रेस के पुराने नेताओं ने इंदिरा गांधी के इस तरह के निर्णय लेने पर नाराजगी जताई। यहां तक कि उन्हें कांग्रेस पार्टी से निकाल दिया। इंदिरा गांधी को नई पार्टी बनानी पड़ी।इंदिरा गांधी अपने निर्णयों से पीछे नहीं हटी। उन्होंने गरीबों की आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए गरीबी हटाओ आंदोलन शुरू किया। किसानों और गरीबों के बीच 1970 एवं 1971 में इंदिरा गांधी देश मे सबसे लोकप्रिय नेता बनकर सामने आई। आम जनता ने उन्हें बहुत पसंद किया।
इंदिरा गांधी द्वारा बैंकों के राष्ट्रीयकरण और राजाओं के प्रीवीपर्स को बंद करने का, आम जनता ने स्वागत किया।आम जनता के मन में इंदिरा गांधी के प्रति एक अलग छवि का निर्माण हुआ। इंदिरा गांधी की आम जनता के बीच में, विशेष रुप से गरीबों और आदिवासियों के बीच में अभूतपूर्व लोकप्रियता बनी। महात्मा गांधी और जवाहरलाल नेहरू के बाद इंदिरा गांधी सबसे लोकप्रिय नेता बनी। उसके बाद से आज तक अन्य किसी नेता में यह लोकप्रियता देखने को नहीं मिली। उत्तर भारत का कोई भी नेता दक्षिण के राज्यों में कभी लोकप्रिय नहीं हुआ। दक्षिण के राज्यों में इंदिरा गांधी, इंदिराम्मा के नाम लोकप्रिय हुई। उनकी एक सफल जन नेता के रूप में राष्ट्रीय स्तर की पहचान थी। बैंकों के राष्ट्रीयकरण का जो निर्णय 1969 में इंदिरा गांधी ने लिया था। उसके बाद देश में आर्थिक एवं सामाजिक गतिविधियां बेहतर हुई ।
1971 का पाकिस्तान से जो युद्ध हुआ। भारत ने कुछ ही दिनों के युद्ध में पाकिस्तान के 95000 सैनिकों को आत्मसमर्पण के लिए विवश कर दिया था। वहीं पाकिस्तान से बांग्लादेश को अलग कर एक स्वतंत्र राष्ट्र बनाकर पाकिस्तान से बंगाल की सीमा को सुरक्षित किया। वहीं मिजोरम सिक्किम जैसे राज्यों की सीमाओं को सुरक्षित करने के लिए राजनीतिक निर्णय लिए। परिणाम स्वरूप 1971 युद्ध के बाद फिर किसी पड़ोसी देश ने भारत के ऊपर हमला करने की हिमाकत नहीं की।
1969 तक कांग्रेस पार्टी में राजा रजवाड़ों और बड़े-बड़े उद्योगपतियों का बहुत प्रभाव था। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इस प्रभाव को खत्म करने के लिए जहां बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया। वहीं राजाओं के प्रिवीपर्स को बंद करके सरकार की आर्थिक व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में अभूतपूर्व काम किया था। परिणाम स्वरूप 1980 तक देश बढ़ती हुई जनसंख्या के बाद भी कृषि के क्षेत्र में आत्मनिर्भर हो गया था। वहीं बैंकों के राष्ट्रीयकरण के बाद भारत का विकास बड़ी तेज गति से रफ्तार पकड़ पाया। जो आज तक देखने को मिल रहा है।