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तुलसी की खेती कर अनीता बाई ने बनाई नई पहचान

Posted by khalid on



तुलसी की खेती कर अनीता बाई ने बनाई नई पहचान

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के गृह जिले सीहोर में तुलसी की खेती चर्चा का विषय बनी हुई है l एक ऐसे समय पर जब फसलें प्राकृतिक प्रकोप का शिकार हो रही हैं और किसान हैरान हैं, तब जिले के इछावर ब्लॉक की ग्राम सिराडी की महिला अनिता बाई ने तुलसी की खेती से अच्छा-खासा लाभ अर्जित कर सभी को चौका दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत से प्रेरणा लेकर अनिता ने ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत इस काम की शुरुआत की थी l राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के द्वारा स्व सहायता समूह की महिलाओं को सोयाबीन के साथ-
साथ आईटीसी के माध्यम से औषधीय पौधों की खेती के अंतर्गत तुलसी,अश्वगंधा आदि की फसल का एक दिवसीय प्रशिक्षण दिया गया प्रशिक्षण प्राप्त कर ग्राम बिझौली, शाहपुरा, जमुनिया फतेहपुर, सिराड़ी एवं मोगरा की लगभग8 से 10 महिला कृषकों द्वारा सफलतापूर्वक तुलसी की खेती की जा रही है तुलसी आयुर्वेदिक पद्धति में उपयोग किया जाने वाला महत्वपूर्ण पौधा है। इसकी जड़ एवं पत्तियों का उपयोग रोग व्याधि क्षमता को बढ़ाने के लिए किया जाता है। वर्तमान समय में प्रकृति के प्रकोप एवं बारिश की मार से सोयाबीन का उत्पाद भले ही बहुत कम हुआ है परंतु तुलसी की फसल लहलहा रही हैं। लगभग 60 से 70 दिन बाद आज यह पौधे 3 से 4 फीट के हो चुके हैं। तुलसी की खेती से इन महिला कृषकों को ना केवल आर्थिक लाभ होता है, वल्कि मृदा के सूक्ष्म कणों को भी लाभ पहुंचता है अनीता ने 1 एकड़ भूमि में लगभग 9000 की लागत से तुलसी की खेती की गई जिसमें 300 प्रति एकड़ बीज और शेष गोबर खाद, निंदाई, गुड़ाई, सिंचाई आदि पर व्यय हुआ है। आईटीसी के माध्यम से इन औषधीय पौधों को औषधीय निर्माण हेतु संस्था द्वारा खरीद लिया जाता है। इस प्रकार अनीता द्वारा तुलसी की खेती कर ना केवल अपनी आर्थिक स्थिति सुधारी वल्कि खेत और आसपास के वातावरण को भी शुद्ध किया जा रहा है।