प्राइम टाइम

प्राइम टाइम

Posted by Divyansh Joshi on



केरल स्थित सबरीमला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश करने के बाद विरोध प्रदर्शन हिंसक रूप लेता जा रहा है. शुक्रवार देर रात कन्नूर जिले में सीपीएम और भाजपा नेताओं के घर पर बम से हमले हुए।वहीं विरोध में शुक्रवार सुबह तक 1,369 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है. मंदिर में महिलाओं के प्रवेश करने के बाद से राज्य में स्थिति तनावपूर्ण है और कई जगह विरोध प्रदर्शन हुए.बताया जा रहा है कि राज्य में 100 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं जिसमें 21 पुलिसकर्मी भी शामिल हैं। कई जगहों पर आगजनी और तोड़फोड़ की भी खबरें आई हैं. मामले में 1369 लोगों की गिरफ्तारी के अलावा 717 लोगों को हिरासत में लिया गया और 801 केस भी दर्ज किए जा चुके हैं। तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए उत्तरी केरल के कासरगोड जिले के मंजेश्वरम तालुक और पलक्कड़ शहर में कर्फ्यू लगा दिया गया है। इस सबके बीच आपको बताते हैं कि क्या है सबरी माला विवाद और क्यों यहां के श्रद्धालु इतना उग्र होते जा रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमाला मंदिर में हर उम्र की महिलाओं को प्रवेश और पूजा करने की इजाजत दे दी है. इससे पहले तक 10 साल से लेकर 50 साल की उम्र वाली महिलाओं को मंदिर में प्रवेश की इजाजत नहीं थी। साल 2006 में मंदिर के मुख्य ज्योतिषी परप्पनगडी उन्नीकृष्णन ने कहा था कि मंदिर में स्थापित अयप्पा अपनी ताकत खो रहे हैं और वह इसलिए नाराज हैं क्योंकि मंदिर में किसी युवा महिला ने प्रवेश किया है। इसके बाद ही कन्नड़ एक्टर प्रभाकर की पत्नी जयमाला ने दावा किया था कि उन्होंने अयप्पा की मूर्ति को छुआ और उनकी वजह से अयप्पा नाराज हुए. जयमाला ने दावा किया था कि साल 1987 में वह अपने पति के साथ जब मंदिर में दर्शन करने गई थीं तो भीड़ की वजह से धक्का लगने के चलते वह गर्भगृह पहुंच गईं और भगवान अयप्पा के चरणों में गिर गईं। जयमाला के दावे पर केरल में खूब हंगामा हुआ. इसके बाद मंदिर में महिलाओं का प्रवेश वर्जित होने के इस मुद्दे पर लोगों का ध्यान गया। साल 2006 में राज्य के यंग लॉयर्स असोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट में इसके खिलाफ याचिका दायर की. करीब 10 साल तक ये मामला लटका रहा. बाद में याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर के ट्रस्ट से महिलाओं को मंदिर में प्रवेश की इजाजत न देने पर जवाब मांगा। बोर्ड ने कहा था कि भगवान अयप्पा ब्रह्मचारी थे और इस वजह से मंदिर में वही बच्चियां और महिलाएं प्रवेश कर सकती हैं, जिनका मासिक धर्म शुरू न हुआ हो या फिर खत्म हो चुका हो। नवंबर 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने अपना रुख जाहिर किया. कोर्ट ने कहा कि वह सबरीमाला मंदिर में हर उम्र की महिलाओं को प्रवेश देने के पक्ष में है.। केरल में शैव और वैष्णवों में बढ़ते वैमनस्य के कारण एक मध्य मार्ग की स्थापना की गई थी, जिसमें अय्यप्पा स्वामी का सबरीमाला मंदिर बनाया गया था। इसमें सभी पंथ के लोग आ सकते हैं। ये मंदिर लगभग 800 साल पुराना माना जाता है। अयप्पा स्वामी को ब्रह्मचारी माना गया है, इसी वजह से मंदिर में उन महिलाओं का प्रवेश वर्जित था जो रजस्वला हो सकती थीं।