व्यक्तित्व

अलविदा कह गए भाजपा के 'अरुण'

Posted by Divyansh Joshi on



अपने राजनीतिक कौशल से विरोधियों को भी दोस्त बनाने की कला में माहिर बीजेपी के वरिष्ठ नेता और एनडीए सरकार में मंत्री रहे अरुण जेटली नहीं रहे। अरुण जेटली का जन्म 28 दिसंबर 1952 को दिल्ली में हुआ था. उनके पिता का नाम महाराज किशन जेटली था जो एक वकील थे अरुण जेटली की स्कूली पढ़ाई दिल्ली के सेंट जेवियर स्कूल से हुई. इसके बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी के श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स से अपनी ग्रेजुएशन की डिग्री ली और फिर दिल्ली यूनिवर्सिटी से ही लॉ की डिग्री हासिल की. 66 साल के अरुण जेटली की छात्र जीवन से ही राजनीति में रुचि रही और 1973 के बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। 1974 में वह दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ के अध्यक्ष चुने गए और 1975-77 के दौरान वह देश में लगे आपात काल के दौरान प्रीवेंशन और आफ डिटेंशन का सामना करने वाले भी बने। जेल से रिहा हुए तो जनसंघ के सक्रिय सदस्य बने।80 के दशक में अरुण जेटली ने देश के विभिन्न हाईकोर्ट और सुप्रीमकोर्ट में बतौर वकील अपनी पहचान बनाई। जनवरी 1990 में वह दिल्ली हाईकोर्ट के नामित वरिष्ठ अधिवक्ता बने। 1989 में तत्कालीन वीपी सिंह की सरकार ने जेटली को देश का एडिशनल सॉलीसीटर जनरल बनाया। ।वकालत के करियर को धार देने के बाद अरुण जेटली ने फिर राजनीति की तरफ समय देना शुरू किया। 1991 में वह भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में शामिल हुए। 1999 में अरुण जेटली को पार्टी ने राष्ट्रीय प्रवक्ता बनाया। लोकसभा चुनाव के बाद देश में अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में एनडीए के बैनर तले भाजपा सत्ता में आई। अटल जी के नेतृत्व वाली इस सरकार में अरुण जेटली को सूचना एवं प्रसारण राज्यमंत्री मिला। बाद में, जेटली को विधि एवं न्याय मंत्रालय में मंत्री बनाया गया और नवंबर 2000 में तत्कालीन कानून मंत्री राम जेठमलानी के त्यागपत्र देने के बाद जेटली को केंद्रीय कानून मंत्री की जिम्मेदारी मिली। 2002 में जेटली फिर भाजपा के संगठन में चले गए 2003 में फिर वाजपेयी मंत्रिमंडल में शामिल हुए। इस बार उन्हें वाणिज्य मंत्रालय का जिम्मा सौंपा गया। 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को पूर्ण बहुमत मिलने के बाद जेटली ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार के गठन में अहम भूमिका निभाई। ।अरुण जेटली का स्वास्थ्य 2014 से उन्हें धोखा देता रहा। अनियंत्रित डायबिटीज से निजात पाने के लिए सितंबर 2014 में गैस्ट्रिक बाईपास सर्जरी कराई। इसके कुछ समय बाद मई 2018 में जेटली को किडनी की बिमारी से परेशान होकर किडनी ट्रांसप्लांट के दौर से गुजरे। 2019 के जनवरी महीने में उन्हें एक और गंभीर बिमारी ने घेर लिया। वह साफ्ट टिश्यू कैंसर की गिरफ्त में आ गए। स्वास्थ्य वजहों के चलते जेटली ने 2019 में दोबारा सत्ता में आने पर मोदी सरकार की कैबिनेट में न जाने की इच्छा जताई। पिछली 9 अगस्त से वे एम्स के गहन चिकित्सा कक्ष में गंभीर आवस्था में भर्ती थे।