व्यक्तित्व

आचार्य श्री विद्यासागर जी ने कलश स्थापना कार्य क्रम में श्रद्धालु ओ को प्रवचन में संबोधित करते हुए

Posted by khalid on



नेमावर (सीहोर) शतरंज के खेल में राजा आगे भी बढ़ता है और पीछे भी हटता है। ऊंट हमेशा तिरछा चलता है एवं घोड़ा ढाई घर चलता है, हाथी भी सीधे आगे पीछे चलता है लेकिन पैदल सेना तो हमेशा आगे बढ़ती है, वह कभी पीछे नहीं हटती।आचार्य श्री विद्यासागर जी ने कलश स्थापना कार्य क्रम में श्रद्धालु ओ को प्रवचन में संबोधित करते हुए आगें कहाँ की - उसी प्रकार राष्ट्र रक्षा में लगे सैनिक राष्ट्र की रक्षा से कभी पीछे नहीं हटते। वैसे ही भगवान ॠषभनाथ और महावीर भगवान की चर्या चली आ रही है। उस परंपरा का पालन करने वाला साधक भी एक बार जो कदम आगे बढ़ा देता है, तो फिर कभी पीछे नहीं हटता। पंचम काल अभी शेष है और धर्म का अभी अभाव नहीं ।