प्राइम टाइम

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Posted by Divyansh Joshi on



मध्यप्रदेश की नवगठित 15वीं विधानसभा सत्र का दूसरा दिन हंगामेदार रहा। सुबह सदन की कार्रवाई शुरू होते ही दो विधायक यशोधरा राजे सिंधिया और मालिनी गौड को प्रोटेम स्पीकर दीपक सक्सेना ने शपथ दिलाई। भाजपा विधायक गोपाल भार्गव को नेता प्रतिपक्ष चुना गया। मुख्यमंत्री कमलनाथ ने उन्हें बधाई दी, भार्गव ने उन्हें सकारात्मक सहयोग की बात कही । सदन की कार्यवाही शुरू होते ही प्रोटेम स्पीकर ने बिना वोटिंग के ध्वनिमत के आधार पर एनपी प्रजापति को स्पीकर घोषित कर दिया। पिछले 52 साल के विधानसभा की कार्य़वाही में ऐसा पहली बार हुआ जब विधानसभा अध्यक्ष को लेकर चुनाव कराना पड़ा । सन 1967 में स्पीकर पद के लिए वोटिंग हुई थी।जिसका भाजपा के विधायकों ने विरोध किया और वेल में आकर जमकर नारेबाजी की।जिसके बाद सदन की कार्यवाही दो बार 10- 10 मिनिट के लिए स्थगित करनी पड़ी लेकिन विपक्ष नहीं माना और उन्होने सदन से वाकआउट कर दिया और कांग्रस सरकार पर लोकतंत्र की हत्या करने का आरोप लगाया। भाजपा ने लोकतंत्र की हत्या बंद करो के नारे के साथ सदन से वाकआउट कर दिया। इसके बाद बसपा विधायक द्वारा वोटिंग की मांग करने पर प्रोटेम स्पीकर ने मत विभाजन कराया। मत विभाजन में प्रजापति को 120 वोट मिले । जिसके बाद गोटेगांव से कांग्रेस विधायक नर्मदा प्रसाद प्रजापति मध्यप्रदेश की 15 वीं विधानसभा के 17वें अध्यक्ष बनाए गए । इसके बाद मुख्यमंत्री कमलनाथ ने विधानसभा अध्यक्ष नर्मदा प्रसाद प्रजापति को बधाई दी । स्पीकर के चुनाव के दौरान अध्यक्ष दीर्घा में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, सुरेश पचौरी मौजूद थे। तीनों नेता सदन की कार्यवाही पर नजर रखे हुए थे। जब प्रोटेम स्पीकर ने सदन की कार्यवाही स्थगित की जब मुख्यमंत्री कमलनाथ ने अध्यक्ष प्रवेश द्वारा से स्पीकर के कक्ष में जाकर चर्चा की। करीब 10 मिनट के तक रणनीति पर चर्चा हुई। विपक्ष के विधायकों ने राजभवन तक पैदल मार्च निकला और राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा और चुनाव कराने की मांग की है। भाजपा का कहना है कि वह कोर्ट भी जा सकती है। सभी कानूनी सलाह लेने के बाद कोई फैसला लिया जाएगा। इस दौरान पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज ने कांग्रेस पर लोकतंत्र की हत्या के आरोप लगाए और इसे इतिहास का काला दिन बताया। प्रोटेम स्पीकर के फैसले के बाद पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि आज का दिन लोकतंत्र के लिए काला दिन है। सदन से वॉकआउट करने के बाद शिवराज ने आरोप लगाया कि हमारे प्रत्याशी विजय शाह के नाम को प्रस्तावित करने का अवसर नहीं दिया गया। शिवराज ने मुख्यमंत्री कमलनाथ से इस्तीफे की मांग की है। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि एनपी प्रजापति का चुनाव असंवैधानिक है। सदन में नियमों को ताक पर रखकर उनके नाम की घोषणा की गई।वहीं उनके इस जवाब में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने कहा कि मैंने भी दस साल की राजनीति छोड़ कर धैर्य रखा था ।शिवराज बौखलाये नही। सत्ता तो आती जाती रहती है।
इसके बाद सदन की कार्यवाही 3 बजे फिर शुरु हुई और यहां राज्यपाल आनंदी बेन पटेल का अभिभाषण हुआ । जिसके बाद वित्त मंत्री तरुण भनोट ने अनुपूरक बजट पटल पर रखा। अनुपूरक बजट पर चर्चा 9 जनवरी को होगी। विधानसभा की कार्यवाही बुधवार तक के लिए स्थगित कर दी गई ।