व्यक्तित्व

राजीव कुमार- जिन्होने प.बंगाल को सुर्खियों में कर दिया

Posted by Divyansh Joshi on



शारदा चिटफंड घोटाले के सिलसिले में शनिवार, नौ फरवरी को शिलॉन्ग में कोलकाता के पुलिस आयुक्त राजीव कुमार से सीबीआई पूछताछ कर रही है। 2013 में सामने आए इस मामले में राजीव कुमार ने एसआईटी की अगुवाई की थी। राजीव कुमार 1989 बैच के पश्चिम बंगाल कैडर के आईपीएस अधिकारी हैं. राजीव कुमार का जन्म उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ ज़िले में हुआ. उन्होंने आईआईटी कानपुर से कंप्यूटर साइंस में इंजीनियरिंग की पढ़ाई की.अपनी पुलिस की नौकरी में उन्होंने अपनी तकनीकी जानकारी का खूब इस्तेमाल किया. उन्हें पश्चिम बंगाल पुलिस में सर्विलांस का बेहतर इस्तेमाल करके अपराधियों को पकड़ने के लिए जाने जाता है.90 के दशक में राजीव कुमार ने बीरभूम जिले में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रहते हुए कोयला माफ़ियाओं के ख़िलाफ़ मुहिम छेड़ी थी. उन्होंने कई कोयला माफियाओं को पकड़ा, इस वक्त पश्चिम बंगाल में कोयला माफ़ियाओं के ख़िलाफ़ कोई पुलिस अधिकारी कार्रवाई नहीं करते थे.कुमार को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का बेहद भरोसेमंद अधिकारी माना जाता है.पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी कोलकाता के पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार को बचाने के लिए खुलकर आ गईं. उन्होंने सबसे पहले पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार के घर का दौरा किया और फिर कोलकाता के मेट्रो चैनल पर धरना पर बैठ गई थी। उन्हें 2016 में सुरजीत कर पुरकायस्थ की जगह कोलकाता पुलिस कमिश्नर के तौर पर नियुक्त किया गया था.इससे पहले कुमार विधाननगर पुलिस कमिश्नरी में बतौर पुलिस कमिश्नर भी तैनात रह चुके हैं. इसके अलावा वह कोलकाता पुलिस के स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) चीफ के रूप में भी काम कर चुके हैं.राजीव कुमार ने शारदा और रोज वैली चिटफंड घोटालों की जांच करने वाली एसआईटी की अगुवाई भी की थी. ये मामले साल 2013 में सामने आए थे.राजीव कुमार को फिटनेस फ्रीक कहा जाता है. उन्होंने अपने चैंबर में भी फिटनेस के उपकरण लगा रखे हैं. जब समय मिलता है तो उस पर वर्कआउट करते हैं. बीच बीच में ब्रेक मिलने पर पुशअप्स करते हैं.