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तेंदूखेड़ा - आखिर कब खुलेगा बालिका छात्रावास कई वर्षों से उठ रही मांग

Posted by Divyansh Joshi on



मध्य प्रदेश सरकार ने प्रदेश की बालिकाओं को शिक्षित करने अनेक योजनाएं लागू की है जगह-जगह स्कूल एवं महाविद्यालय खोले गए हैं परंतु खेद का विषय है कि तहसील मुख्यालय तेंदूखेड़ा में शासन की कुछ महत्वपूर्ण बुनियादी सुविधाओं से अछूता है तेंदूखेड़ा की सीमा 2 जिला सागर एवं रायसेन को छूता है ज्यादातर आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र तेंदूखेड़ा से जुड़े हैं जहां पर शासकीय संस्थाओं में ज्यादातर हरिजन आदिवासी छात्राएं अध्ययन करती हैं करीबन 40% छात्राएं यहां रहने की व्यवस्था न होने गरीबी एवं आवागमन के उचित साधन न होने से बीच में ही अपनी पढ़ाई छोड़ देती हैं बसों की प्रतीक्षा में काफी समय नष्ट होता है बसों में काफी भीड़भाड़ होना भी माता पिता को मजबूरन बीच में पढ़ाई छुड़वाने की मजबूरी होती है इन विद्यालयों में अध्ययनरत छात्राओं की संख्या में 50% ग्रामीण क्षेत्रों की होती हैं कुल छात्राओं में करीबन 40% हरिजन आदिवासी है छात्राओं में काफी जागरुकता हो सकता होती है अध्ययन के लिए परंतु संसाधन के अभाव में पढ़ाई से वंचित रह जाती हैं नगर के जागरुक नागरिकों एवं पत्रकारों ने अनेक बार इन छात्राओं के हित के लिए नगर में महिला छात्रावास खोलने बात उठाई परंतु प्रशासन के कानों में कोई जू नहीं रेगा शिक्षा विभाग तो शायद तेंदूखेड़ा को अपने जिले में ही नहीं मानता नगर में छात्रों को रोकने छात्रावास है परंतु जिन्हें काफी जरूरत है और छात्रावास की सुविधा उपलब्ध नहीं कराई जा रही यह बात आज तक समझ में नहीं आ रही कि छात्रावास खोलने ऐसी कौन सी बाधा बनती है यदि आज हम देखें तो प्रदेश के शासकीय विद्यालयों में छात्र छात्राओं की संख्या काफी कम है परंतु वहां संसाधन सब है पर्याप्त शिक्षक हैं पर्याप्त संकाय हैं परंतु तेंदूखेड़ा जहां साथ ही विद्यालयों में छात्र छात्राओं की संख्या काफी अधिक है परंतु सुविधाओं की काफी कमी है यह वही कहावत है जहां दांत है वहां चना नहीं और चना है वहां दांत नहीं

जिले के उच्च अधिकारियों से अनुरोध है कि वे गंभीरता से बालिका छात्रावास खोलने जाने की पहल करें अन्य संसाधन सुविधाएं ना दे तो भी चल जावेगा छात्राएं स्वयं मेहनत कर अपना भविष्य उज्ज्वल कर शासन के आंकड़े सुधारने में सहयोग कर सकेंगे