प्राइम टाइम

प्राइम टाइम - सरकार के खिलाफ बोलना अब आसान नहीं होगा

Posted by Divyansh Joshi on



संसद में जिस तरीके से यूएपीए, एनआईए,सूचना अधिकार कानून और 3 तलाक बिल के संशोधन बिल पास किए गए हैं। उससे सरकार की मंशा स्पष्ट है, कि सरकार के खिलाफ बोलने वाले लोगों और विपक्षी दलों को नियंत्रित करने के लिए ही सरकार ने यह संशोधन बिल पास कराए। जिससे केंद्र सरकार को असीमित शक्तियां मिल गई हैं। संसद में चंद घंटों की बहस के बाद यह सारे बिल पास हुए हैं। इसके साथ ही तीन तलाक बिल भी बड़ी जल्दबाजी में पास किया गया है। सरकार किसी भी बिल को स्टेडिंग कमेटी में भेजने को राजी नहीं हुई। इसको लेकर यह कहा जा रहा है, सरकार एक नई दिशा की ओर बढ़ गई है। जिसके कारण संघीय व्यवस्था और दोहरी नागरिकता जैसे विषयों में गंभीर परिणाम देखने को मिल सकते हैं। गैरकानूनी गतिविधियां निरोधक कानून की अनुसूची 4 के तहत, राष्ट्रीय जांच एजेंसी अब किसी भी व्यक्ति को ना केवल आतंकवादी घोषित कर सकती है, बल्कि उसकी संपत्ति को भी जप्त कर सकती हैं। जो संशोधन बिल पास हुआ है, उसके अनुसार अब संबंधित राज्य के डीजीपी से भी अनुमति लेने की जरूरत नहीं होगी। अर्थात कानून व्यवस्था में जो राज्य की जिम्मेदारी होती थी, उससे वह प्रथक हो गई हैं। केंद्र की राष्ट्रीय जांच एजेंसी एनआईए अब भारत के किसी भी राज्य में जाकर कोई भी कार्यवाही कर सकती है। किसी भी व्यक्ति को आतंकवादी घोषित कर सकती है, उसकी संपत्ति जप्त कर सकती है। इससे राज्यों तथा नागरिकों के मौलिक अधिकार सीमित हो गए हैं। उम्मीद है कि सरकार अपने उत्तरदायित्व को समझते हुए भारतीय संविधान की मूल भावना, मौलिक अधिकारों और संघीय व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए निर्णय करेगी।