प्राइम टाइम

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Posted by Divyansh Joshi on



पिछले साल की शुरुआत में महाराष्ट्र सांप्रदायिक हिंसा की आग में झुलस गया था. इस घटना के बाद प्रभावित इलाके में हालात कई दिनों तक तनावपूर्ण रहे. सांप्रदायिक हिंसा की आग में कई सालों से लोग झुलसते आ रहे है. साल 2004-17 में देश के अलग-अलग-अलग हिस्सों में हुई सांप्रदायिक हिंसा में हज़ारों लोगों की जान चली गई। भारत में साल 2004 से 2017 के बीच सांप्रदायिक हिंसा की 10,399 घटनाएं हुईं। इसमें 1,605 लोग मारे गए और 30,723 लोग घायल हुए. गृह मंत्रालय ने एक आरटीआई के जवाब में यह जानकारी दी है। सूचना का अधिकार आवेदन के तहत खुलासा हुआ है कि सांप्रदायिक हिंसा की सबसे अधिक 943 घटनाएं 2008 में हुईं. साल 2008 में हिंसा में 167 लोग मारे गए और 2,354 लोग घायल हुए। गृह मंत्रालय ने नोएडा के आईटी प्रोफेशनल और आरटीआई कार्यकर्ता अमित गुप्ता की अर्जी के जवाब में कहा कि हिंसा के सबसे कम 580 मामले 2011 में दर्ज किए गए । इस दौरान 91 लोगों की मौत हुई और 1,899 लोग घायल हुए। गुप्ता ने यह भी पूछा कि इस दौरान सांप्रदायिक झड़पों, दंगों और लड़ाइयों के संबंध में कितने लोग गिरफ्तार और दोषी सिद्ध हुए. इस पर मंत्रालय ने बताया कि ऐसे आंकड़े राज्य सरकार के पास होते हैं क्योंकि पुलिस और सार्वजनिक व्यवस्था राज्य का विषय है। आरटीआई से मिले जवाब के अनुसार 2017 में सांप्रदायिक हिंसा के 822 मामले दर्ज किए गए, जिसमें 111 लोग मारे गए और 2,384 घायल हुए. जबकि 2016 में, 703 मामले दर्ज किए गए थे, 86 लोग मारे गए थे और 2,321 घायल हुए थे। इसी तरह 2015 में 751 मामले सामने आए, 97 लोग मारे गए और 2,264 घायल हुए. जबकि 2014 में सांप्रदायिक झड़पों के 644 मामले सामने आए, 95 लोग मारे गए और 1,921 लोग घायल हुए। इससे पहले पिछले साल केंद्र सरकार ने बताया कि साल 2017 में देश में सांप्रदायिक हिंसा की 822 घटनाएं हुईं जिनमें 111 लोगों की मौत हो गई. गृह राज्य मंत्री हंसराज गंगाराम अहीर ने राज्यसभा को बताया कि साल 2016 में सांप्रदायिक हिंसा की 703 घटनाएं हुईं जिनमें 86 लोगों की जान गई. वहीं 2015 में सांप्रदायिक हिंसा की 751 घटनाओं में 97 लोग मारे गए थे। हालांकि 2015 से पहले तक के आंकड़ों को देखें तो 2014 से लेकर 2017तक में सांप्रदायिक हिंसा की 2,920 घटनाएं हुईं हैं जिसमें 389 लोगों की मौत हो गई. वहीं इन घटनाओं में 8,890 लोग घायल हुए।